इजरायल चुनाव में नेतन्याहू गठबंधन 53 सीटों पर अटका, बहुमत से 8 दूर; सरकार गठन पर सस्पेंस बरकरार
27 सीटों के साथ लिकुड सबसे बड़ी पार्टी
चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, पार्टी की इस सफलता के बावजूद गठबंधन बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सका। केंद्रीय चुनाव समिति ने विशेष मतपत्रों की गिनती भी पूरी कर ली है। इन मतपत्रों को डबल-एनवेलप वोट कहा जाता है। इनमें सैनिकों, कैदियों, विदेशों में तैनात राजनयिकों और अस्पतालों में भर्ती उन मतदाताओं के वोट शामिल होते हैं, जो अपने निर्धारित मतदान केंद्रों पर मतदान नहीं कर सके थे।
अन्य दलों में गादी आइजनकोट की याशार पार्टी को 21 सीटें, बी’याचाद को 12 और जॉइंट लिस्ट को 11 सीटें मिली हैं। डेमोक्रेट्स और राअम ने आठ-आठ सीटें हासिल की हैं। वहीं, यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म, इजरायल बेइतेनु और ओत्जमा येहुदित को सात-सात सीटें मिली हैं। शास और रिलिजियस जियोनिज्म के खाते में छह-छह सीटें आई हैं।
केंद्रीय चुनाव समिति के मुताबिक, विशेष मतपत्रों की गिनती पूरी हो चुकी है, लेकिन अंतिम आधिकारिक नतीजे बाद में जारी किए जाएंगे। मतगणना पूरी होने के बाद भी प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों की सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
विदेशी हस्तक्षेप और वोट खरीदने के आरोपों से बढ़ा विवाद
चुनाव परिणामों के बीच विदेशी हस्तक्षेप और अरब मतदाताओं की भागीदारी को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने आरोप लगाया है कि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को कथित वोट खरीदने और अवैध तरीके से मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने का फायदा मिला। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को ‘चोरी’ करार दिया है।
इजरायल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट उन आशंकाओं की जांच कर रही है, जिनमें कतर और तुर्की से कथित तौर पर जुड़े विदेशी धन के इस्तेमाल के जरिए अरब मतदाताओं की भागीदारी को अवैध रूप से प्रभावित करने की बात कही गई है। इसके अलावा, इजरायल पुलिस की लाहव 433 इकाई चुनाव में कथित रिश्वतखोरी के आरोपों की अलग से जांच कर रही है।
आरोपों की पुष्टि नहीं, कतर ने हस्तक्षेप से किया इनकार
विदेशी दखल और चुनावी गड़बड़ी से जुड़े आरोपों की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष नोआम सोलबर्ग ने शिन बेट से संभावित विदेशी हस्तक्षेप की जांच करने को कहा है। हालांकि, चुनाव समिति के कार्यवाहक महानिदेशक ने कहा कि चुनाव की निष्पक्षता को व्यवस्थित तरीके से प्रभावित किए जाने के आरोपों का कोई आधार नहीं है। कतर ने भी इजरायल के चुनाव में किसी तरह का हस्तक्षेप करने से इनकार किया है।
इस विवाद के बीच अरब पार्टियों की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। इन दलों के पास कुल 19 सीटें हैं, जो सरकार गठन की प्रक्रिया में अहम साबित हो सकती हैं। विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि बिना पुष्टि वाले आरोपों के आधार पर चुनाव परिणामों या अरब मतदाताओं की भागीदारी को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
इजरायल में सरकार बनाने के लिए किसे मिलेगा समर्थन?
मौजूदा सीटों के आंकड़ों के मुताबिक, नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों के साथ बहुमत से आठ सीट दूर है, जबकि विपक्षी गठबंधन के पास 48 सीटें हैं। ऐसे में दोनों पक्षों को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों का समर्थन हासिल करना होगा।
विपक्ष के लिए अरब पार्टियों का समर्थन या सहयोग महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इन दलों के साथ राजनीतिक गठबंधन का सवाल कई यहूदी नेतृत्व वाली पार्टियों के लिए विवादास्पद बना हुआ है। दूसरी तरफ, नेतन्याहू के गठबंधन को भी सत्ता में बने रहने या नई सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का समर्थन जुटाना होगा।
बहुमत नहीं मिला तो फिर हो सकते हैं चुनाव
अंतिम आधिकारिक नतीजों को प्रमाणित किए जाने के बाद इजरायल के राष्ट्रपति सरकार गठन की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इस प्रक्रिया के तहत किसी सांसद को गठबंधन तैयार करने और सरकार बनाने का प्रयास करने के लिए चुना जाएगा। इसके बाद संबंधित सांसद को संसद में बहुमत का समर्थन जुटाना होगा।
यदि कोई भी राजनीतिक गठबंधन 61 सांसदों का समर्थन हासिल करने में नाकाम रहता है, तो इजरायल में दोबारा चुनाव कराने की स्थिति बन सकती है। फिलहाल नेतन्याहू गठबंधन की बढ़त के बावजूद बहुमत से दूरी और विपक्ष की रणनीति ने सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता बनाए रखी है।
