बंगाल में BJP की बड़ी जीत से बदले सियासी समीकरण! 70% मुस्लिम आबादी वाली रेजीनगर सीट पर कैसे खिल गया कमल?

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 70 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं वाली इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार शंखारभ सरकार ने 75 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट से मुस्लिम नेता हुमायूं कबीर ने जीत हासिल की थी। ऐसे में उपचुनाव के नतीजे को राज्य के बदले राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद बदला चुनावी मुकाबला

2026 के विधानसभा चुनाव में आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने नउदा और रेजीनगर, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ दी, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराना पड़ा।

पिछले विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर को रेजीनगर में 1,23,536 वोट मिले थे। भाजपा के बापन घोष 64,660 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि तृणमूल कांग्रेस के अताउर रहमान को 41,718 वोट मिले थे।

उपचुनाव में हुमायूं कबीर की पार्टी ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह सीट पर पार्टी का कब्जा बरकरार नहीं रख सके। भाजपा उम्मीदवार शंखारभ सरकार की जीत के बाद इस क्षेत्र में हुमायूं कबीर के राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी का दावा, मुस्लिम मतदाताओं ने भी दिया साथ

उपचुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि रेजीनगर में भाजपा को 60 प्रतिशत और नंदीग्राम में 80 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले हैं। उन्होंने कहा कि बंगाली मुसलमान राज्य के विकास में भाजपा का साथ देना चाहते हैं और आने वाले समय में पार्टी को 60 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं।

शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि भाजपा को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय के बीच डर और आशंकाएं फैलाई गई थीं। उन्होंने कहा कि भाजपा के सत्ता में आने पर मुसलमानों को बांग्लादेश भेजने और नजरबंदी शिविरों में रखने जैसी बातें प्रचारित की गईं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछले पांच महीनों में राज्य सरकार के कामकाज को देखने के बाद लोगों की धारणा में बदलाव आया है।

विकास और रोजगार के मुद्दों पर भाजपा ने किया प्रचार

रेजीनगर उपचुनाव में भाजपा के प्रचार अभियान में विकास, रोजगार और स्थानीय बुनियादी सुविधाओं को प्रमुखता दी गई। पार्टी ने पुल, अस्पताल, कॉलेज और औद्योगिक पार्क जैसी परियोजनाओं का मुद्दा उठाया। प्रवासी मजदूरों को वापस लाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने का वादा भी चुनाव प्रचार का हिस्सा रहा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में प्रचार करते हुए कहा कि लोगों की जरूरत धार्मिक विवादों के बजाय विकास और रोजगार से जुड़ी है। शुभेंदु अधिकारी ने भी स्थानीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, विकास से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति ने भाजपा को पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से आगे जाकर मतदाताओं तक पहुंचने का अवसर दिया।

बाबरी मस्जिद की घोषणा का चुनाव पर क्या असर पड़ा?

हुमायूं कबीर ने विधानसभा चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा की थी। इस बयान ने राज्य की राजनीति में काफी चर्चा बटोरी थी। हालांकि, रेजीनगर उपचुनाव में भाजपा ने अपने प्रचार में भावनात्मक और धार्मिक मुद्दों के बजाय विकास तथा रोजगार को केंद्र में रखा।

भाजपा नेताओं का कहना था कि स्थानीय जनता को कॉलेज, अस्पताल, उद्योग और रोजगार जैसी सुविधाओं की जरूरत है। चुनाव के नतीजों के बाद यह चर्चा भी शुरू हुई कि धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय विकास के वादों ने मतदाताओं के फैसले में क्या भूमिका निभाई।

हुमायूं कबीर और पुलिस के बीच टकराव भी रहा चर्चा में

6 अक्टूबर को मतदान के दिन हुमायूं कबीर और पुलिस के बीच झड़प की घटना सामने आई थी। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। हुमायूं कबीर ने पुलिस पर मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। विपक्ष की ओर से भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए, जबकि भाजपा और राज्य नेतृत्व ने मतदान में धांधली के आरोपों को खारिज किया।

इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि मतदान के दिन बने तनावपूर्ण माहौल का चुनाव प्रचार और मतदाताओं पर कितना असर पड़ा।

भाजपा उम्मीदवार ने धार्मिक पहचान के बजाय विकास पर दिया जोर

रेजीनगर से भाजपा उम्मीदवार शंखारभ सरकार ने चुनाव प्रचार के दौरान अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक मतदाताओं के मुद्दे पर बात करने के बजाय विकास को प्राथमिकता देने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग धार्मिक पहचान पर आधारित राजनीति से थक चुके हैं और अब उन्हें कॉलेज, उद्योग तथा विकास चाहिए।

शंखारभ सरकार ने यह भी कहा कि अलग-अलग दौर में अल्पसंख्यक मतदाताओं ने कांग्रेस, वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस का समर्थन किया। उनके मुताबिक, अब शुभेंदु अधिकारी की सरकार में मतदाताओं ने विकास की उम्मीद के साथ भाजपा को वोट दिया है।

रेजीनगर में भाजपा की जीत के बाद बंगाल की राजनीति में अल्पसंख्यक मतदाताओं के रुझान, स्थानीय विकास के मुद्दों और हुमायूं कबीर के प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है।

 

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