बाढ़ से तबाह नेपाल ने भारत से मांगी बड़ी मदद, 2015 के भूकंप का भी दिया हवाला; पुनर्निर्माण पर होगी मदद
नई दिल्ली: नेपाल में पिछले महीने बोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित संपत्तियों और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए नेपाल ने भारत से महत्वपूर्ण सहायता मांगी है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने गुरुवार शाम भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में सहयोग का अनुरोध किया। हालांकि, नेपाल की ओर से किसी निश्चित राशि की मांग नहीं रखी गई। नेपाली अधिकारी के मुताबिक, वाग्ले ने उम्मीद जताई कि भारत पुनर्निर्माण के लिए महत्वपूर्ण सहायता देगा।
निर्मला सीतारमण ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत नेपाल की आपदा के बाद की जरूरतों का आकलन करेगा। पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट की रिपोर्ट आने के बाद नेपाल की आवश्यकताओं के आधार पर भारत सहायता की सीमा तय करेगा।
बाढ़ से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
बोटेकोशी नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ के कारण संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। नेपाल सरकार ने नुकसान और पुनर्निर्माण की जरूरतों का आकलन करने के लिए पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट शुरू कराया है। इसकी अंतिम रिपोर्ट करीब चार सप्ताह में आने की उम्मीद है।
बैठक के दौरान भारत और नेपाल के बीच करीब 10 साल पहले तय की गई लाइन ऑफ क्रेडिट और उसके इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।
2015 के भूकंप के बाद भारत ने दी थी 100 अरब रुपये की सहायता
वर्ष 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने पुनर्निर्माण और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए करीब 100 अरब रुपये की सहायता का ऐलान किया था। इसमें 25 अरब रुपये अनुदान और 75 अरब रुपये सॉफ्ट लोन के रूप में दिए जाने थे।
हालांकि, अलग-अलग शर्तों के कारण नेपाल इस कर्ज का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर सका। अब नेपाल इस राशि को ऊर्जा क्षेत्र में इस्तेमाल करने की संभावना पर भी विचार कर रहा है।
बाढ़ के बाद नेपाल की प्राथमिकताएं बदलीं
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खानाल ने हाल ही में भारत यात्रा के दौरान बुनियादी ढांचे, खासकर सड़क और ऊर्जा क्षेत्र के लिए 500 मिलियन डॉलर की अनुदान सहायता और 500 मिलियन डॉलर के रियायती ऋण का प्रस्ताव रखा था। लेकिन बोटेकोशी बाढ़ के बाद नेपाल की प्राथमिकताओं में बदलाव आया है और इस प्रस्ताव की दोबारा समीक्षा की जा रही है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बाढ़ के बाद हालात बदल गए हैं और अब पुनर्निर्माण तथा क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करना प्राथमिकता बन गया है।
राहत और बचाव में भारत के सहयोग को सराहा
भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार, निर्मला सीतारमण ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना जताई और नेपाल के राहत एवं पुनर्निर्माण प्रयासों में भारत के निरंतर सहयोग का भरोसा दिया।
वहीं, स्वर्णिम वाग्ले ने राहत सामग्री और बचाव अभियान के दौरान भारत की ओर से दिए गए तकनीकी सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा और कनेक्टिविटी समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर भी चर्चा की।
रसुवा और नुवाकोट में पुनर्निर्माण की तैयारी
नेपाल सरकार ने बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में पुनर्निर्माण और पुनर्वास की जरूरतों का आकलन करने के लिए एक समिति बनाई है। आकलन पूरा होने के बाद नेपाल दाता सम्मेलन आयोजित कर सकता है या मित्र देशों, अंतरराष्ट्रीय दाता संगठनों और चैरिटेबल संस्थाओं से अलग-अलग सहायता मांग सकता है।
नेपाल बोटेकोशी नदी के किनारे भविष्य में जलवायु संबंधी आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत और टिकाऊ बुनियादी ढांचा विकसित करने पर भी जोर दे रहा है।
भारत दौरे पर कई अहम बैठकों में शामिल होंगे वाग्ले
स्वर्णिम वाग्ले तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं। वित्त मंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा और पद संभालने के बाद पहली विदेश यात्रा है। दौरे के दौरान वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। इस बैठक में कनेक्टिविटी, व्यापार, ट्रांजिट, कारोबारी सहयोग और बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
वाग्ले भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे और नेपाल में भारतीय निवेश बढ़ाने का आग्रह करेंगे। वह भारतीय कारोबारी नेताओं को नेपाल में निवेश और कारोबार आसान बनाने के लिए हाल में किए गए कानूनी बदलावों की जानकारी भी देंगे।
इसके अलावा, वाग्ले भारत के पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन की मेजबानी में होने वाली एक कूटनीतिक बैठक में भी शामिल होंगे। इसमें करीब 15 वरिष्ठ भारतीय राजनयिकों के शामिल होने की उम्मीद है। नेपाल के वित्त मंत्री के मुताबिक, इन बैठकों के जरिए भारत के विभिन्न नीति-निर्माता समुदायों को नेपाल की मौजूदा परिस्थितियों और नई सरकार के बारे में जानकारी देने का अवसर मिलेगा।
