भारत की समुद्री ताकत बढ़ाने की तैयारी, 42 युद्धपोतों के बाद 78 नए जहाज और पनडुब्बियां बनाने की योजना

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नई दिल्ली: भारतीय नौसेना अपनी समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, करीब 2.41 लाख करोड़ रुपये की योजनाओं के तहत नए युद्धपोतों, पनडुब्बियों और तेज गति वाले अवरोधक जहाजों को बेड़े में शामिल करने की तैयारी है। नौसेना के 42 युद्धपोत पहले से ही निर्माण के लिए ऑर्डर पर हैं। इसके अलावा 78 नए युद्धपोतों और पनडुब्बियों के साथ 120 तेज गति वाले अवरोधक नौका-पोतों की योजना का भी उल्लेख किया गया है। इन प्रयासों का मकसद समुद्री सुरक्षा मजबूत करने और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की परिचालन क्षमता बढ़ाना है।

200 से अधिक जहाजों के बेड़े की दिशा में कदम

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय नौसेना के 42 युद्धपोत पहले से ही निर्माणाधीन हैं या निर्माण प्रक्रिया में हैं। इसके अतिरिक्त, चार लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक यानी ऐसे बड़े पोतों के लिए चयनित शिपयार्डों को प्रस्ताव के लिए अनुरोध जारी किया गया है, जिनका इस्तेमाल सैनिकों और सैन्य उपकरणों को समुद्र से तट तक पहुंचाने में किया जा सकता है।

अगली पीढ़ी के फ्रिगेट युद्धपोतों के लिए भी प्रस्ताव मांगे जा चुके हैं। इसके साथ ही 120 तेज गति वाले अवरोधक पोतों की योजना भी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। इन पोतों की मदद से तटीय क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा संबंधी अभियानों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और आधुनिक तकनीक पर जोर

नौसेना पारंपरिक युद्ध प्रणालियों के साथ नई तकनीकों को भी अपनाने पर काम कर रही है। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, ड्रोन और ड्रोन को रोकने वाली प्रणालियां शामिल हैं। इन तकनीकों का इस्तेमाल निगरानी, सूचना जुटाने और समुद्री अभियानों की क्षमता बढ़ाने में किया जा सकता है।

एकीकृत पूर्ण विद्युत प्रणोदन प्रणाली यानी आईएफईपी को भी महत्वपूर्ण तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। इसके लिए भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग का समझौता हुआ है। इस प्रणाली का उद्देश्य बड़े नौसैनिक पोतों में बिजली उत्पादन और ऊर्जा के इस्तेमाल को बेहतर बनाना है, ताकि विभिन्न उपकरणों और हथियार प्रणालियों को ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सके।

योजना में स्वदेशी 24 से 28 मेगावाट क्षमता वाली समुद्री गैस टरबाइन और भारत में विकसित डीजल इंजनों को भी शामिल किया गया है। इन तकनीकों के विकास से नौसैनिक उपकरणों और प्रणोदन प्रणालियों में घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा।

स्वदेशी हथियारों और नवाचार को बढ़ावा

26 और 27 अक्टूबर को आयोजित होने वाले ‘स्वावलंबन 2026’ सेमिनार का जिक्र करते हुए वाइस एडमिरल कोचर ने कहा कि भारतीय नौसेना को आत्मनिर्भर और बहुआयामी नेटवर्क आधारित सैन्य बल बनाना उद्देश्य है।

रिपोर्ट के अनुसार, आईडीईएक्स ढांचे के तहत भारतीय स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से 4,000 से अधिक नए विचार और प्रस्ताव मिले हैं। इनमें क्वांटम आधारित स्थिति निर्धारण प्रणाली, उच्च शक्ति वाले माइक्रोवेव निर्देशित ऊर्जा हथियार, स्वायत्त पानी के भीतर चलने वाले वाहन और चुंबकीय रैमजेट इंजन जैसी तकनीकों से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।

इन परियोजनाओं पर काम के जरिए स्वदेशी रक्षा तकनीक और हथियार प्रणालियों के विकास को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे नौसेना की जरूरतों के लिए देश में ही आधुनिक उपकरण विकसित करने की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित रहेगा।

समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर फोकस

नौसेना की इन योजनाओं में नए युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण के साथ आधुनिक तकनीक तथा स्वदेशी प्रणालियों के विकास को भी महत्व दिया जा रहा है। जहाज निर्माण, ऊर्जा प्रणालियों, ड्रोन और पानी के भीतर काम करने वाले स्वायत्त वाहनों जैसे क्षेत्रों में निवेश का उद्देश्य समुद्री अभियानों के लिए भारत की क्षमता मजबूत करना है।

 

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