मोहम्मद रफी भी थे मन्ना डे की गायकी के मुरीद, पहलवान बनने का था सपना; जिंदगी के एक मोड़ पर पुलिस हिरासत तक पहुंचे

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नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में अपनी शास्त्रीय गायकी और सुरीली आवाज से खास पहचान बनाने वाले मन्ना डे आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हैं। ‘एक चतुर नार’, ‘ऐ मेरी जोहरा जबीं’ और ‘जिंदगी कैसी है पहेली’ जैसे सदाबहार गीतों ने उन्हें अमर बना दिया। 24 अक्टूबर 2013 को दुनिया को अलविदा कहने वाले मन्ना डे की 13वीं पुण्यतिथि पर उनकी जिंदगी के संघर्ष, संगीत के प्रति समर्पण और उनसे जुड़े दिलचस्प किस्से एक बार फिर याद किए जा रहे हैं।

गायक बनने से पहले पहलवान बनने का था सपना

मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चंद्र डे था। उनका जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ था। संगीत के साथ-साथ बचपन में उन्हें कुश्ती और मुक्केबाजी का भी शौक था। वह पहलवान बनकर अपनी पहचान बनाना चाहते थे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने कुश्ती का प्रशिक्षण लिया और ऑल बंगाल कुश्ती प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंचे।

उनकी आत्मकथा ‘मेमोरीज कम अलाइव’ में इस दौर के अनुभवों का जिक्र मिलता है। बताया जाता है कि कमजोर होती नजर और कुश्ती के दौरान चश्मा टूटने से लगी चोट ने उनके खेल के रास्ते में मुश्किलें खड़ी कर दीं। आखिरकार उन्हें खेल और संगीत में से किसी एक को चुनना पड़ा। उन्होंने संगीत को अपना जीवन बनाया और आगे चलकर भारतीय पार्श्व गायन के दिग्गजों में शामिल हुए।

कॉलेज में भी छाया रहता था उनकी गायकी का जादू

मन्ना डे की संगीत प्रतिभा कॉलेज के दिनों से ही दिखाई देने लगी थी। स्कॉटिश चर्च कॉलेज में वह दोस्तों के बीच मेज को तबले की तरह बजाकर गाने गाते थे। उनकी गायकी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने लगातार तीन साल तक कॉलेजों के बीच आयोजित गायन प्रतियोगिताओं में पहला स्थान हासिल किया।

उनके चाचा कृष्ण चंद्र डे ने उन्हें संगीत की शुरुआती शिक्षा दी। बाद में उन्होंने उस्ताद अमान अली खान और उस्ताद अब्दुल रहमान खान जैसे गुरुओं से प्रशिक्षण लिया। शास्त्रीय संगीत की गहरी समझ और सुरों पर मजबूत पकड़ ने उन्हें अपने दौर के दूसरे गायकों से अलग पहचान दिलाई।

मुंबई पहुंचकर शुरू हुआ लंबे संघर्ष का दौर

वर्ष 1942 में मन्ना डे अपने चाचा के साथ मुंबई पहुंचे। यहां उन्होंने संगीत की दुनिया में जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। शुरुआती दौर में उन्होंने संगीतकारों के सहायक के रूप में काम किया। वर्ष 1943 में फिल्म ‘तमन्ना’ से उनके पार्श्व गायन करियर की शुरुआत हुई। सुरैया के साथ गाया गया उनका शुरुआती गीत उनके करियर का अहम पड़ाव बना।

इसके बाद फिल्म ‘मशाल’ के गीत ‘ऊपर गगन विशाल’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। छह दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने हिंदी, बांग्ला और अन्य भारतीय भाषाओं में 3,500 से ज्यादा गीत रिकॉर्ड किए। शास्त्रीय संगीत पर आधारित गीतों से लेकर भावपूर्ण फिल्मी नग्मों तक, उनकी गायकी का दायरा काफी व्यापक रहा।

मोहम्मद रफी भी करते थे उनकी प्रतिभा की सराहना

मन्ना डे की गायकी को उनके दौर के कई दिग्गज कलाकारों से सम्मान मिला। मोहम्मद रफी की ओर से उनकी प्रतिभा की प्रशंसा किए जाने का किस्सा भी अक्सर सुनाया जाता है। मन्ना डे की आवाज में शास्त्रीय संगीत की मजबूती और भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति का अनूठा मेल था।

वर्ष 1968 में आई फिल्म ‘पड़ोसन’ का गीत ‘एक चतुर नार’ उनकी प्रतिभा का यादगार उदाहरण है। किशोर कुमार के साथ इस गीत में उनकी गायकी का रोचक मुकाबला आज भी श्रोताओं को आकर्षित करता है। वहीं फिल्म ‘आनंद’ का गीत ‘जिंदगी कैसी है पहेली’ उनकी आवाज से जुड़ी अमर संगीत रचनाओं में गिना जाता है।

लखनऊ में कार्यक्रम के दौरान पुलिस हिरासत तक पहुंचने का किस्सा

मन्ना डे की जिंदगी में एक ऐसा प्रसंग भी बताया जाता है, जब उन्हें पुलिस हिरासत में जाना पड़ा था। किस्से के मुताबिक, वह लखनऊ में एक संगीत कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन कार्यक्रम के आयोजक कथित तौर पर गायब हो गए। इससे नाराज दर्शकों ने शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने मन्ना डे से पूछताछ की। बाद में अन्य कलाकारों के हस्तक्षेप से मामला सुलझने और उन्हें राहत मिलने की बात कही जाती है। यह घटना उनके जीवन से जुड़े अप्रत्याशित प्रसंगों में शामिल है।

पत्नी के निधन के बाद बढ़ गया था अकेलापन

मन्ना डे की निजी जिंदगी में भी कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव आए। उनकी पत्नी सुलोचना कुमरन का जनवरी 2012 में निधन हो गया था। दोनों ने करीब छह दशक साथ बिताए थे। पत्नी के जाने के बाद उनके जीवन में अकेलापन बढ़ने की बात कही जाती है।

स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बाद 24 अक्टूबर 2013 को बेंगलुरु में उनका निधन हो गया। भले ही मन्ना डे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, शास्त्रीय संगीत पर पकड़ और सदाबहार गीत आज भी संगीत प्रेमियों की कई पीढ़ियों को अपनी ओर खींचते हैं।

 

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