यूपी चुनाव से पहले SIR पर विपक्ष हुआ एकजुट, NDA के सामने बढ़ी चुनौती; अब रणनीति बदलने की तैयारी!
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच विपक्षी दल इस मुद्दे पर एक मंच पर आते दिखाई दे रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सामने विपक्ष के हमलों का जवाब देने के साथ जनता के बीच चुनाव प्रक्रिया को लेकर भरोसा बनाए रखने की चुनौती है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के सामने लगातार कई राजनीतिक मुद्दे आए। नीट पेपर लीक के बाद देशभर में छात्र आंदोलन हुआ और इसके बाद एसआईआर को लेकर विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग को घेरना शुरू किया। नीट मामले में छात्रों के दबाव के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।
विपक्षी दलों की एकजुटता ने बढ़ाई सियासी हलचल
एसआईआर के मुद्दे पर शुरुआत में विपक्षी दलों के बीच पूरी तरह एकजुटता दिखाई नहीं दे रही थी। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इसी आधार पर विपक्ष पर पलटवार भी किया। हालांकि, सड़कों पर हुए विरोध प्रदर्शनों और अलग-अलग विपक्षी दलों की भागीदारी ने इस मुद्दे पर उन्हें साझा मंच पर आने का मौका दिया।
विपक्ष के इस अभियान में छात्र संगठनों की भागीदारी और जनता के एक वर्ग के समर्थन के संकेतों ने सत्तारूढ़ गठबंधन की चिंता बढ़ाई है। चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद के बीच सरकार अब स्थिति को संभालने के लिए राजनीतिक और संवाद से जुड़े नए विकल्पों पर विचार कर रही है।
सिर्फ आरोपों का जवाब नहीं, जनता का भरोसा कायम रखना चुनौती
एनडीए के नेताओं के बीच इस बात पर चर्चा हो रही है कि एसआईआर को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देना अकेला पर्याप्त नहीं होगा। चुनाव प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच भरोसा बनाए रखना भी अहम होगा।
विपक्ष लगातार एसआईआर और चुनाव आयोग के मुद्दे को भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान के तौर पर उठा रहा है। ऐसे में भाजपा के सामने अपनी स्थिति को जनता के बीच स्पष्ट करने की चुनौती है।
विपक्ष के अभियान की धार कुंद करने की तैयारी
चुनाव आयोग के समर्थन में भाजपा के खुलकर सामने आने के बाद बने राजनीतिक माहौल को बदलने के लिए एनडीए की ओर से देशभर में अभियान चलाए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस अभियान के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ एसआईआर को लेकर एनडीए का पक्ष जनता तक पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है।
सत्ता पक्ष की रणनीति में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि एसआईआर को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब किस तरह दिया जाता है और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक टकराव से अलग जनता के सामने किस रूप में रखा जाता है।
यूपी समेत पांच राज्यों के चुनाव पर टिकी नजर
आगामी विधानसभा चुनावों के कारण एसआईआर का मुद्दा एनडीए के लिए और महत्वपूर्ण हो गया है। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने अपने सहयोगी दलों को साथ लेकर विपक्ष के राजनीतिक हमलों का जवाब देने की चुनौती है।
एनडीए के घटक दलों में जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और अपना दल समेत अन्य सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, एसआईआर को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद का जमीनी स्तर पर कितना असर पड़ेगा, इसका आकलन अभी स्पष्ट नहीं है।
