राफेल डील पर फंसा पेंच! भारत की स्वदेशी हथियार प्रणाली वाली शर्त से फ्रांस की बढ़ी मुश्किलें
भारत में बनेंगे 96 राफेल विमान
राफेल खरीद प्रक्रिया से जुड़े वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत 18 विमान फ्रांस में तैयार किए जाएंगे, जबकि 96 विमानों का निर्माण भारत में होगा। भारत चाहता है कि इन विमानों में स्वदेशी मिसाइल, रडार और अन्य रक्षा प्रणालियां लगाई जाएं, ताकि घरेलू रक्षा तकनीक को बढ़ावा मिल सके।
स्वदेशी हथियारों की शर्त पर फ्रांस से मतभेद
फ्रांस का रुख है कि राफेल विमानों में इस्तेमाल होने वाली रक्षा प्रणालियां भी उसी से खरीदी जानी चाहिए। दूसरी ओर, भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और देश में विकसित तकनीक को प्राथमिकता देने पर जोर दे रहा है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और इसे सौदे की अहम शर्त माना जा रहा है।
सोर्स कोड दिए बिना हथियार लगाने पर जोर
वायुसेना के एक अधिकारी का कहना है कि भारतीय हथियार प्रणाली को राफेल में शामिल करने के लिए फ्रांस को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भारत सोर्स कोड की मांग नहीं कर रहा है। वायुसेना का मानना है कि स्वदेशी प्रणालियों को विमान में जोड़ने का रास्ता निकाला जा सकता है, बिना विमान के मूल सॉफ्टवेयर का कोड हासिल किए।
50 फीसदी स्वदेशी सामग्री पर बनी थी सहमति
इससे पहले भारत ने भारत में बनने वाले 96 राफेल विमानों में 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल की शर्त रखी थी। शुरुआत में फ्रांस इसके लिए तैयार नहीं था, लेकिन बाद में उसने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। अब भारतीय हथियार प्रणालियों को शामिल करने का मुद्दा बातचीत का नया केंद्र बन गया है।
वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने हाल ही में कहा था कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल सौदे पर चालू वित्त वर्ष के अंत तक समझौता हो सकता है। ऐसे में इस शर्त पर जल्द फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है।
दसाल्ट एविएशन क्यों नहीं देना चाहती सोर्स कोड?
सूत्रों के अनुसार, राफेल बनाने वाली कंपनी दसाल्ट एविएशन को आशंका है कि भारतीय हथियार प्रणालियों को जोड़ने की प्रक्रिया में सोर्स कोड साझा करने की जरूरत पड़ सकती है। सोर्स कोड वह सॉफ्टवेयर निर्देश होता है, जो विमान और उसमें लगी विभिन्न प्रणालियों के संचालन में अहम भूमिका निभाता है। भारत को यह कोड मिलना विमान की तकनीक से जुड़ा संवेदनशील मामला माना जाता है, इसलिए कंपनी इसे साझा करने के पक्ष में नहीं है।
वायुसेना का दावा, भारत ने निकाल लिया रास्ता
वायुसेना से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रक्षा कंपनियां आम तौर पर अपने विमानों का सोर्स कोड खरीदार देशों को नहीं देतीं। भारत भी दसाल्ट से इसकी मांग नहीं कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने ऐसा तरीका विकसित कर लिया है, जिससे सोर्स कोड के बिना भी राफेल विमानों में भारतीय हथियार प्रणालियां स्थापित की जा सकती हैं।
