‘अपना झंडा अपने घर में लगाओ’, नया राष्ट्रीय ध्वज बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई याचिकाकर्ता को फटकार
नई दिल्ली: नया राष्ट्रीय ध्वज घोषित करने की मांग वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने खुद तैयार किए गए झंडे को भारत का नया राष्ट्रीय ध्वज बनाने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से तिरंगे के रंगों और उनके महत्व को लेकर सवाल किए और कहा कि राष्ट्रीय ध्वज पहले से कानून के तहत निर्धारित है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछे तिरंगे को लेकर सवाल
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए याचिकाकर्ता ने हिंदी में अपनी दलील रखते हुए कहा कि उसने न्याय और सनातन धर्म की रक्षा के लिए एक नया झंडा तैयार किया है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि देश संकट का सामना कर रहा है और उसने सत्य के आधार पर यह झंडा बनाया है। उसने अदालत से मांग की कि उसके डिजाइन किए गए झंडे को नया राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया जाए।
‘आप अपना झंडा अपने घर में लगाइए’
याचिकाकर्ता की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या वह तिरंगे की जगह अपने बनाए झंडे को राष्ट्रीय ध्वज बनाना चाहता है। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि यह सत्य का झंडा है और न्याय के लिए बनाया गया है।
इसके बाद पीठ ने कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज पहले से तय है और कानून के तहत मान्यता प्राप्त है। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह तिरंगे के रंगों का अर्थ बता सकता है। इसके बाद पीठ ने साफ शब्दों में कहा, “आप अपना झंडा अपने घर में लगाइए।”
याचिका पर आगे सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने अपने बनाए झंडे को एक मंदिर में भी लगाया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आगे चर्चा करने से इनकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया।
