भारत आएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, 17 अक्टूबर से शुरू होगा दौरा; ट्रेड डील पर समझौते की बढ़ी उम्मीद
ट्रेड डील पर जयशंकर ने दिया बड़ा संकेत
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को संकेत दिया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत किसी नतीजे की ओर बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है।
नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के दौरान जयशंकर ने कहा कि उन्हें लगता है कि व्यापार समझौते का मुद्दा अब किसी निष्कर्ष की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका अपनी घरेलू औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने और दूसरे देशों को अपने बाजार तक पहुंच देने की शर्तों में बदलाव करने की कोशिश कर रहा है।
जयशंकर के मुताबिक, अमेरिकी रणनीति में आए बदलाव के कारण भारत समेत दूसरे देशों को भी अपने आर्थिक संबंधों की शर्तों का नए सिरे से आकलन करना पड़ रहा है।
उज्बेकिस्तान के बाद भारत पहुंचेंगे मार्को रुबियो
अमेरिकी विदेश विभाग की घोषणा के अनुसार, रुबियो पहले उज्बेकिस्तान के समरकंद जाएंगे। वहां वह मध्य एशिया के पांच गणराज्यों के साथ होने वाली सी5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके बाद उनका भारत आने का कार्यक्रम है।
इस साल यह उनकी भारत की दूसरी आधिकारिक यात्रा होगी। भारत में रुबियो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी, क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम तथा ऊर्जा सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
इसके अलावा, वह कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे। इस बैठक का उद्देश्य निवेश और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के रास्ते तलाशना होगा।
मई में भी भारत आए थे अमेरिकी विदेश मंत्री
मार्को रुबियो इससे पहले मई में चार दिवसीय भारत दौरे पर आए थे। उस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। रुबियो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी लेकर आए थे।
जयशंकर के साथ बातचीत में रुबियो ने भरोसा जताया था कि भारत और अमेरिका एक टिकाऊ व्यापार समझौते तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा था कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है और अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो।
मई की बैठकों में ऊर्जा स्रोतों में विविधता, परमाणु सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज, प्रौद्योगिकी और भारतीय यात्रियों के वीजा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक में व्यापार और ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था।
टैरिफ और बाजार तक पहुंच अब भी बड़ी चुनौती
भारत और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ने के संकेतों के बावजूद व्यापार समझौते की राह में कुछ अहम चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें अमेरिकी शुल्क नीति यानी टैरिफ और दोनों देशों के बाजारों तक पहुंच से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्टूबर को कहा था कि बातचीत एक ठहराव पर पहुंच गई है और दोनों पक्षों के लिए आगे रियायत देना मुश्किल होता जा रहा है।
अमेरिका अपने व्यापार असंतुलन को दूर करने और भारतीय बाजार में अधिक पहुंच हासिल करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, भारत चाहता है कि समझौते की शर्तों से घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों के हित सुरक्षित रहें और भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर प्रतिकूल असर न पड़े।
ऐसे में मार्को रुबियो की आगामी यात्रा को दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, दौरे के दौरान किसी समझौते पर अंतिम मुहर लगेगी या नहीं, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
