राहुल गांधी की नजर में रहे गैरहाजिर सांसद! प्रदर्शन में भागीदारी बढ़ाने के लिए बनाई खास रणनीति, सहयोगी दलों ने भी दिखाई एकजुटता
गैरहाजिर सांसदों की सूची बनाने के निर्देश, संगठन पर बढ़ा जोर
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी अपनी प्रमुख टीम के साथ लगातार बैठकें कर रहे थे। इन बैठकों में प्रियंका गांधी वाड्रा, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और अन्य रणनीतिक सहयोगी शामिल थे। प्रदर्शन की रूपरेखा तय करने के साथ-साथ सांसदों और पार्टी नेताओं की जिम्मेदारियों पर भी विचार किया गया।
शुरुआती प्रदर्शनों में कुछ कांग्रेस सांसदों की गैरमौजूदगी को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद राहुल गांधी ने केसी वेणुगोपाल से प्रदर्शन में शामिल होने वाले और अनुपस्थित रहने वाले सांसदों की सूची तैयार करने को कहा। पार्टी के एक सूत्र के अनुसार, जब सांसदों को पता चला कि राहुल गांधी खुद उनकी मौजूदगी पर नजर रख रहे हैं, तो प्रदर्शन में उनकी भागीदारी बढ़ने लगी।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पार्टी नेताओं को संदेश दिया कि आंदोलन में भागीदारी को लेकर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस चाहती थी कि सांसद केवल सामाजिक माध्यमों पर बयान देने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रदर्शन में प्रत्यक्ष रूप से भी अपनी भूमिका निभाएं।
दिल्ली में कार्यकर्ताओं के ठहरने की व्यवस्था, राज्यों के नेताओं से संपर्क
प्रदर्शन में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने विशेष इंतजाम किए। दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय को कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए खोला गया। हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के नेताओं ने कार्यकर्ताओं के दिल्ली पहुंचने और उनके रहने की व्यवस्था में सहयोग किया।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न राज्यों के नेताओं से संपर्क कर उन्हें जल्द से जल्द दिल्ली पहुंचने का आग्रह किया। इस रणनीति का उद्देश्य प्रदर्शन को व्यापक बनाना और संगठन के अलग-अलग स्तरों पर सक्रियता बढ़ाना था।
ममता बनर्जी से अखिलेश यादव तक, सहयोगियों को साथ लाने की कोशिश
राहुल गांधी की रणनीति का एक अहम हिस्सा INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करना भी था। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और माकपा नेता एमए बेबी समेत कई नेताओं से संपर्क किया।
इससे पहले कुछ प्रदर्शनों के दौरान सहयोगी दलों की ओर से पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने और कांग्रेस नेताओं को अधिक प्रमुखता दिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इन मतभेदों को दूर करने के लिए इस बार छोटे सहयोगी दलों को भी उचित स्थान देने पर जोर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के दौरान राहुल गांधी जिस खुले ट्रक से नेतृत्व कर रहे थे, उसमें सहयोगी दलों और छात्र संगठनों के नेताओं को भी जगह दी गई। इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि आंदोलन किसी एक पार्टी का शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि विपक्ष की साझा मुहिम है।
सपा समेत कई दलों के साथ बेहतर तालमेल, छात्र संगठनों को भी जोड़ा
कांग्रेस की पहल के बाद गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर भी चर्चा हुई। समाजवादी पार्टी समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने इस बार कांग्रेस के साथ बेहतर तालमेल की बात कही। पार्टी ने राजनीतिक दलों के अलावा छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया, ताकि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और कथित वोट चोरी के आरोपों पर व्यापक समर्थन जुटाया जा सके।
कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष की एकजुटता पर जोर
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और कथित वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस कार्यसमिति तथा INDIA गठबंधन की बैठकों में चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस मुद्दे पर मिलकर आवाज उठाने पर जोर दिया।
कांग्रेस का मानना है कि सांसदों की सक्रिय भागीदारी, सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल और नागरिक समाज की हिस्सेदारी से आंदोलन को व्यापक बनाया जा सकता है। फिलहाल राहुल गांधी की सक्रियता के साथ विपक्षी एकजुटता और संगठनात्मक अनुशासन का मुद्दा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। इस रणनीति का आगे कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
