7.7, 7.4… अब 6.7, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में क्यों आ रहे हैं इतने बड़े भूकंप?

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नई दिल्ली: एक के बाद एक बड़े भूकंपों ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हाल ही में इंडोनेशिया और कोलंबिया समेत कई इलाकों में 7 से ज्यादा तीव्रता के भूकंप आए, जबकि गुरुवार को पेरू में 6.7 तीव्रता का तेज भूकंप दर्ज किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कम समय के भीतर अलग-अलग देशों में आए इन भूकंपों के बीच कोई संबंध है और क्या धरती के भीतर अचानक हलचल बढ़ गई है?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, अलग-अलग हिस्सों में कम समय के अंतराल पर बड़े भूकंप आने का मतलब यह नहीं है कि सभी घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। भूकंप का सबसे बड़ा कारण धरती के भीतर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल है। दुनिया के कई हिस्सों में ये प्लेटें लगातार एक-दूसरे से टकराती, खिसकती या एक-दूसरे के नीचे जाती रहती हैं। इसी वजह से इन क्षेत्रों में भूकंप आने की संभावना भी अधिक रहती है।

पेरू में क्यों आते हैं ज्यादा भूकंप?

पेरू पैसिफिक रिंग ऑफ फायर के सक्रिय हिस्से में स्थित है। यह दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप आने वाले क्षेत्रों में शामिल है। यूएसजीएस के मुताबिक दुनिया के सबसे बड़े भूकंपों में करीब 81 फीसदी इसी क्षेत्र के आसपास दर्ज किए जाते हैं। इसकी मुख्य वजह यहां मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार गतिविधि है।

पेरू के पास नाजका प्लेट दक्षिण अमेरिकी प्लेट के नीचे जा रही है। जब एक टेक्टोनिक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे जाती है तो दोनों के बीच लगातार दबाव बनता रहता है। यह दबाव लंबे समय तक जमा हो सकता है। जब चट्टानें इस दबाव को सहन नहीं कर पातीं और फॉल्ट अचानक खिसक जाता है, तो भूकंप पैदा होता है। यही वजह है कि पेरू और दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी हिस्से में बड़े भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है।

क्या एक भूकंप दूसरे भूकंप को ट्रिगर कर सकता है?

कुछ परिस्थितियों में ऐसा संभव है। वैज्ञानिक इसे डायनैमिक ट्रिगरिंग कहते हैं। आसान भाषा में समझें तो किसी बड़े भूकंप से निकलने वाली तेज भूकंपीय तरंगें दूसरे ऐसे फॉल्ट तक पहुंच सकती हैं, जहां पहले से दबाव जमा हो। इन तरंगों के पहुंचने से वहां मौजूद फॉल्ट में हलचल शुरू हो सकती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पेरू में आया भूकंप इंडोनेशिया या कोलंबिया में आए भूकंपों की वजह बना। बहुत दूर स्थित इलाकों में भूकंपीय तरंगों के कारण हलचल संभव है, लेकिन ऐसे मामलों में होने वाले भूकंप आमतौर पर छोटे होते हैं और ज्यादा देर तक नहीं चलते। इसलिए अलग-अलग देशों में आए बड़े भूकंपों को एक ही श्रृंखला का हिस्सा मानना वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं होगा।

क्या धरती पर अभी सामान्य से ज्यादा भूकंप आ रहे हैं?

धरती पर हर दिन हजारों छोटे भूकंप आते हैं। इनमें से ज्यादातर इतने हल्के होते हैं कि लोगों को उनके झटके महसूस तक नहीं होते। बड़े भूकंप अपेक्षाकृत कम आते हैं। ऐसे में जब थोड़े समय के भीतर अलग-अलग हिस्सों में कई बड़े भूकंप दर्ज होते हैं, तो उनका असर और संख्या लोगों का ध्यान ज्यादा खींचती है।

भूकंप का सही समय और स्थान पहले से बताना अभी वैज्ञानिकों के लिए संभव नहीं है। इसलिए पेरू में आया 6.7 तीव्रता का भूकंप इस बात का प्रमाण नहीं है कि पूरी दुनिया में अचानक भूकंपों की संख्या बढ़ गई है। इसे पेरू के आसपास सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार चल रही सामान्य गतिविधि के संदर्भ में समझना ज्यादा उचित है।

रिंग ऑफ फायर में क्यों कांपती है धरती?

पैसिफिक रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर के आसपास फैला एक विशाल भूगर्भीय क्षेत्र है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाएं मौजूद हैं। इन प्लेटों की आपसी टक्कर, खिसकने और एक प्लेट के दूसरी के नीचे जाने जैसी गतिविधियों के कारण इस पूरे क्षेत्र में भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अधिक देखने को मिलती हैं।

पेरू में आया 6.7 तीव्रता का भूकंप भी इसी प्लेट गतिविधि से जुड़ा है। इसी तरह इंडोनेशिया, कोलंबिया और दूसरे इलाकों में दर्ज हुए बड़े भूकंप वहां की अपनी-अपनी भूगर्भीय परिस्थितियों और प्लेटों की हलचल से जुड़े हैं। इसलिए फिलहाल इन सभी घटनाओं को एक ही कड़ी या किसी वैश्विक भूकंपीय श्रृंखला के रूप में देखना वैज्ञानिक आधार पर उचित नहीं है।

 

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