9 एपिसोड की इस हॉरर सीरीज में छिपा है शापित गांव का खौफनाक रहस्य, कहानी लिखते-लिखते आपस में भिड़ गए थे लेखक! जानें कहां देखें
राजस्थान के शापित गांव से शुरू होती है कहानी
‘दहन-राकन का रहस्य’ की कहानी राजस्थान के शिलासपुर गांव के इर्द-गिर्द घूमती है। यहां आईएएस अधिकारी अवनी राउत की तैनाती होती है, जिसका किरदार टिस्का चोपड़ा ने निभाया है। अवनी अपने पति की मौत के सदमे और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच जिंदगी को संभालने की कोशिश कर रही होती हैं। इसी दौरान उन्हें मैंगोन कॉर्पोरेशन की दुर्लभ खनिजों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खनन परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
शुरुआत में यह मामला एक प्रशासनिक चुनौती लगता है, लेकिन जल्द ही गांव की पुरानी मान्यताओं और रहस्यमयी घटनाओं के कारण हालात बदलने लगते हैं। अवनी के सामने यह सवाल खड़ा हो जाता है कि खनन परियोजना के पीछे छिपी सच्चाई क्या है और गांव में हो रही घटनाओं का असली कारण क्या है।
रिधियाकन के जागने की चेतावनी से बढ़ता है खौफ
गांव के मुखिया स्वरूप की भूमिका सौरभ शुक्ला ने निभाई है। वह जमीन की खुदाई का विरोध करते हुए चेतावनी देते हैं कि धरती से छेड़छाड़ करने पर रिधियाकन नाम का राक्षस जाग सकता है। उनके मुताबिक, ऐसा होने पर पूरे गांव पर संकट आ सकता है।
इसी बीच गांव में मरे हुए पक्षियों के मिलने और रहस्यमयी हत्याओं जैसी घटनाएं सामने आने लगती हैं। इन घटनाओं से कहानी का सस्पेंस और गहरा हो जाता है। दर्शकों के सामने यह सवाल रहता है कि क्या गांव की मान्यताओं में कोई सच्चाई है या इन घटनाओं के पीछे कोई ऐसा राज है, जिसे छिपाया जा रहा है।
अंधविश्वास और विज्ञान के बीच उलझती जांच
सीरीज की कहानी केवल डरावनी घटनाओं तक सीमित नहीं रहती। इसमें वैज्ञानिक जांच और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भी जगह दी गई है। अवनी एक डॉक्टर की मदद से घटनाओं के पीछे संभावित वैज्ञानिक कारण तलाशने की कोशिश करती हैं।
एक तरफ गांव के लोगों की पुरानी मान्यताएं हैं, तो दूसरी ओर खनन परियोजना से जुड़े सवाल और प्रशासनिक दबाव। इन सभी पहलुओं के बीच सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कहानी को आगे बढ़ाती है। यही मेल इसे सामान्य डरावनी कहानियों से अलग बनाता है।
टिस्का चोपड़ा और सौरभ शुक्ला समेत कई कलाकार
सीरीज में टिस्का चोपड़ा और सौरभ शुक्ला के अलावा राजेश तैलंग, मुकेश तिवारी, रोहन जोशी और लहर खान सहित कई कलाकार नजर आते हैं। इसका निर्देशन विक्रांत पंवार और जय शर्मा ने किया है।
कहानी में रहस्य, लोककथाओं, अंधविश्वास और वैज्ञानिक नजरिए को एक साथ पिरोने की कोशिश की गई है। गांव का डरावना माहौल और लगातार सामने आने वाले सवाल दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं।
कहानी लिखने के दौरान लेखकों के बीच क्यों हुई बहस?
इस सीरीज से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा इसकी लेखन प्रक्रिया का भी है। लेखक निसर्ग मेहता ने एक बातचीत में बताया था कि कहानी लिखते समय तीनों लेखकों के बीच अक्सर बहस होती थी। कई बार दो लेखक किसी विचार पर सहमत होते थे, जबकि तीसरा उससे असहमत रहता था।
शिवा बाजपयी के मुताबिक, बहस के दौरान भावनात्मक पल भी आए और कभी-कभी लेखक एक-दूसरे पर पेंसिल तक फेंक देते थे। स्थिति ऐसी हो गई थी कि उन्हें थेरेपिस्ट की मदद भी लेनी पड़ी। हालांकि, लेखकों का कहना था कि आपसी मतभेदों ने कहानी को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई। निर्देशक ने भी उन्हें अपनी कल्पना के अनुसार कहानी विकसित करने की स्वतंत्रता दी थी।
कहां देख सकते हैं ‘दहन-राकन का रहस्य’?
‘दहन-राकन का रहस्य’ डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर उपलब्ध बताई गई है। हॉरर, सस्पेंस और रहस्यमयी घटनाओं वाली कहानियां पसंद करने वाले दर्शक इसे देख सकते हैं। शापित गांव, खनन परियोजना और वैज्ञानिक जांच के मेल के साथ यह सीरीज डर के पीछे छिपे सच को तलाशने की कहानी पेश करती है।
