1 जुलाई से खत्म होगी मनरेगा? केंद्र ला रहा नया ‘जी राम जी’ कानून, ग्रामीणों को मिलेंगे 125 दिन रोजगार
नई दिल्ली: देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा की जगह नए “जी राम जी” (VB-G RAM G Act) कानून को लागू करने की तैयारी में जुट गई है। प्रस्तावित योजना को 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसको लेकर राज्यों के साथ समन्वय और वित्तीय तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।
जानकारी के मुताबिक, अब तक 25 राज्यों ने इस नई योजना के लिए अपने हिस्से का फंड तय कर दिया है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जुड़ी स्थायी समिति की बैठक में इस कानून को लागू करने की रणनीति और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए संसाधनों और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।
मनरेगा की जगह मिलेंगे स्मार्ट जॉब कार्ड
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने समिति को जानकारी दी कि कई राज्यों ने कार्यक्रम के लिए बजट आवंटन कर दिया है और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं। नए कानून के तहत मनरेगा में मिलने वाले पुराने जॉब कार्ड की जगह अब श्रमिकों को “स्मार्ट जॉब कार्ड” दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि इससे लाभार्थियों का रिकॉर्ड और भुगतान व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनाई जाएगी।
अब 100 नहीं, 125 दिन रोजगार की गारंटी
प्रस्तावित “जी राम जी” अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्त वर्ष में 125 दिनों के गारंटीकृत रोजगार का अधिकार मिलेगा। यह मौजूदा मनरेगा योजना के 100 दिनों के रोजगार प्रावधान से ज्यादा है। योजना के अनुसार, अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों को तय समयसीमा के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। अगर समय पर रोजगार नहीं दिया गया तो श्रमिक बेरोजगारी भत्ते के पात्र बने रहेंगे।
ग्रामीण रोजगार योजना के लिए रिकॉर्ड बजट आवंटन
केंद्र सरकार ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम हेतु 95,692.31 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा अनुमानित आवंटन बताया जा रहा है। वहीं राज्यों के संभावित योगदान को मिलाकर इस योजना पर कुल खर्च 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है।
कई राज्यों ने शुरू की वित्तीय तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सरकार भी इस नए कानून को लागू करने की दिशा में तैयारी कर रही है। वहीं कर्नाटक सरकार ने योजना के लिए करीब 6000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। पंजाब सरकार ने 1500 करोड़ रुपये की राशि तय की है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इसके लिए 14 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
