‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद अब ‘इश्क करो पार्टी’ की एंट्री, पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू का ऐलान; बताया क्या है मकसद
नई दिल्ली: देश की राजनीति में इन दिनों नए-नए संगठनों और अभियानों की चर्चा के बीच अब एक और नाम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने ‘इश्क करो पार्टी’ (आईकेपी) शुरू करने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने इस नई पहल के लिए सदस्यता अभियान भी शुरू कर दिया है और लोगों से जुड़ने की अपील की है।
पूर्व न्यायाधीश ने सोशल मीडिया के जरिए इस नई पहल की जानकारी साझा करते हुए कहा कि जो लोग इस अभियान से जुड़ना चाहते हैं, वे पार्टी की आधिकारिक ईमेल आईडी पर संपर्क कर सकते हैं। उनके इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर ‘इश्क करो पार्टी’ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
‘यह कोई मजाक या वैलेंटाइन डे अभियान नहीं’
मार्कण्डेय काटजू ने स्पष्ट किया कि उनकी इस पहल को केवल प्रेम संबंधों या वैलेंटाइन डे जैसी गतिविधियों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसे हल्के में ले रहे हैं, जबकि इसका उद्देश्य कहीं अधिक व्यापक और गंभीर है।
उनके अनुसार, देश जिन सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनसे निपटने के लिए समाज में एकता और आपसी सद्भाव बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण, महंगी शिक्षा, कमजोर स्वास्थ्य सेवाएं और बढ़ती महंगाई जैसी समस्याओं का समाधान तभी संभव है, जब समाज एकजुट होकर इन मुद्दों पर विचार करे।
जाति और धर्म के नाम पर बंटवारे पर जताई चिंता
काटजू ने कहा कि वर्तमान समय में समाज जाति और धर्म के आधार पर विभाजित होता जा रहा है। उनका मानना है कि राजनीतिक लाभ और वोट बैंक की राजनीति के कारण सामाजिक विभाजन और गहरा हुआ है।
उन्होंने कहा कि ‘इश्क करो पार्टी’ का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच प्रेम, भाईचारा और एकता की भावना को मजबूत करना है। उनका दावा है कि सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देकर ही देश की कई बड़ी समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
कॉकरोच जनता पार्टी पर भी साधा निशाना
अपने बयान में मार्कण्डेय काटजू ने हाल ही में चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके पर भी टिप्पणी की। उन्होंने अभिजीत दीपके की कुछ मांगों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल किसी मंत्री के इस्तीफे की मांग करने से व्यवस्था में मूलभूत बदलाव नहीं आता।
काटजू का कहना था कि यदि किसी मंत्री का इस्तीफा भी हो जाए तो उसकी जगह दूसरा व्यक्ति नियुक्त कर दिया जाएगा, इसलिए समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए व्यापक सोच और संरचनात्मक बदलावों पर ध्यान देना अधिक आवश्यक है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
‘इश्क करो पार्टी’ के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर इस पहल को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सामाजिक एकता का संदेश देने वाली पहल बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का नया प्रयोग मान रहे हैं।
फिलहाल, पूर्व न्यायाधीश की इस घोषणा ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
