TMC में महाबगावत! स्टार सांसद सयानी घोष समेत 20 सांसदों ने किया अलग बैठने का दावा, ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर उठी असंतोष की लहर अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। इस घटनाक्रम ने टीएमसी नेतृत्व के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

सबसे अधिक चर्चा जादवपुर से सांसद सयानी घोष के नाम को लेकर हो रही है। पार्टी के युवा और प्रमुख चेहरों में गिनी जाने वाली सयानी घोष का इस कदम से जुड़ना राजनीतिक गलियारों में बड़ी घटना माना जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके इस रुख ने पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

संसद में अलग पहचान की मांग से बढ़ी हलचल

सूत्रों के मुताबिक, सांसदों के समूह ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। इस कदम को टीएमसी के भीतर बढ़ते मतभेदों का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, इस पूरे मामले पर पार्टी नेतृत्व की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतुष्ट सांसदों का यह रुख जारी रहता है तो इसका असर राष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

सयानी घोष का नाम बना चर्चा का केंद्र

सयानी घोष केवल एक सांसद ही नहीं, बल्कि बंगाली फिल्म और संगीत जगत का चर्चित चेहरा भी हैं। उन्हें लंबे समय से पार्टी के युवा नेतृत्व और प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता रहा है। ऐसे में उनका असंतुष्ट खेमे के साथ खड़ा होना टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर कुछ नेताओं में नाराजगी बढ़ रही थी, जो अब खुलकर सामने आने लगी है।

पहले भी विवादों में रह चुकी हैं सयानी घोष

सयानी घोष इससे पहले भी कई राजनीतिक विवादों और चर्चाओं का हिस्सा रह चुकी हैं। विधानसभा चुनावों के दौरान उनके एक गीत को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई थी, जिस पर विपक्षी दलों ने टीएमसी और उसके नेतृत्व पर निशाना साधा था।

हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर पार्टी की एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती से जुड़ा हुआ है।

टीएमसी के सामने बढ़ी चुनौती

लोकसभा सांसदों के इस कदम ने टीएमसी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि असंतुष्ट नेताओं को मनाने में पार्टी सफल नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

फिलहाल सभी की नजरें पार्टी नेतृत्व और बागी सांसदों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति की दिशा बदलने की क्षमता रखता है।

 

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