‘गरीबों से वसूली, अमीरों को राहत?’ राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला, LPG कीमतों और उज्ज्वला योजना को बनाया मुद्दा

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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों की आर्थिक नीतियों और विदेश नीति के कारण देश के गरीब, मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में कमी को लेकर उन्होंने सरकार से कई सवाल पूछे।

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की नीतियों ने लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को फिर से लकड़ी के चूल्हे और उसके धुएं की ओर धकेल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या पहले 12 से घटाकर 9 और अब 4 कर दी गई है।

LPG कीमतों में बढ़ोतरी पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले तीन महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 89 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उनके मुताबिक पहले गैस के दाम बढ़ाए गए और फिर सब्सिडी में कटौती की गई, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रवासी मजदूरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 5 किलो वाले गैस सिलेंडर की कीमत में 323 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे हालात में मजदूर अपनी आय, खर्च और बचत का संतुलन कैसे बनाएंगे।

‘मोदी मॉडल’ पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़े उद्योगपतियों को राहत देने और गरीबों पर आर्थिक बोझ डालने की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा, “मोदी जी, क्या आपकी नाकामियों का बोझ सिर्फ गरीब उठाएंगे? क्या आपकी बनाई इस चरमराती अर्थव्यवस्था की कीमत मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग ही चुकाएंगे?”

उज्ज्वला योजना को लेकर विपक्ष के निशाने पर सरकार

केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को रियायती दर पर मिलने वाले सिलेंडरों की संख्या सालाना 9 से घटाकर 4 किए जाने के फैसले को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि इससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत पहले 12 सब्सिडी वाले सिलेंडरों का वादा किया गया था, जिसे बाद में घटाकर 9 और अब 4 कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे गरीब परिवारों के लिए रसोई गैस का उपयोग और कठिन हो जाएगा।

पश्चिम एशिया संकट का भी असर

सरकारी पक्ष का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिसके चलते इस तरह के फैसले लिए गए हैं। हालांकि विपक्ष इस तर्क को स्वीकार नहीं कर रहा और इसे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला कदम बता रहा है।

 

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