बारिश में बच्चों पर सबसे ज्यादा मंडराता है इन बीमारियों का खतरा, जानिए शुरुआती लक्षण और बचाव के आसान उपाय

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नई दिल्ली: गर्मी से राहत देने वाला मानसून अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। खासकर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण इस मौसम में वे संक्रमण का जल्दी शिकार हो सकते हैं। तापमान में अचानक बदलाव, अधिक नमी, जलभराव और दूषित भोजन व पानी की वजह से वायरल, बैक्टीरियल और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और वायरल बुखार जैसी बीमारियां बच्चों को तेजी से प्रभावित कर सकती हैं। इन बीमारियों में तेज बुखार, शरीर में दर्द, चकत्ते, उल्टी और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यदि बच्चे को लगातार उल्टी, तेज पेट दर्द या रक्तस्राव जैसे गंभीर लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

दूषित भोजन और पानी भी बढ़ाते हैं जोखिम

बारिश के मौसम में दूषित भोजन और पानी के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इससे दस्त, उल्टी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं के लिए गंभीर साबित हो सकती हैं।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

सामान्य सर्दी और फ्लू के दौरान बुखार, थकान, शरीर दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अधिकांश मामलों में यह संक्रमण एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाता है। इस दौरान बच्चे को पर्याप्त आराम, गर्म तरल पदार्थ जैसे सूप और साफ-सुथरा भोजन देना चाहिए। साथ ही उसे अन्य बच्चों के संपर्क में आने से बचाना चाहिए। बार-बार हाथ धोने और खांसते या छींकते समय मुंह व नाक ढंकने की आदत भी जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ी हुई नमी और फंगस के कारण कुछ बच्चों में एलर्जी और अस्थमा की समस्या भी बढ़ सकती है।

बीमारी होने पर क्या करें?

यदि बच्चे में संक्रमण के लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। उपचार के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ओआरएस, दाल का पानी, छाछ और अन्य तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।

बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए उन्हें फल, दूध, अंडे और बादाम जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ नियमित रूप से खिलाने चाहिए। फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें। पीने के लिए उबला हुआ या आरओ/यूवी से शुद्ध किया गया पानी दें। बाहर का मसालेदार और मीठा भोजन, खासकर स्ट्रीट फूड, खाने से बचाएं और घर का ताजा भोजन ही दें।

बच्चों को खाने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत डालें। बारिश में भीगने के बाद उन्हें गर्म पानी से नहलाना संक्रमण का खतरा कम करने में मददगार हो सकता है। वायरल संक्रमण से बचाव के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी रखें और बिना हाथ धोए आंख, नाक या मुंह को छूने से बचें।

डेंगू से बचाव के लिए रखें विशेष ध्यान

डेंगू फैलाने वाले मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपते हैं। इसलिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमलों और अन्य जगहों पर जमा पानी को नियमित रूप से साफ करें। यदि बच्चे में उल्टी, अत्यधिक सुस्ती, पेट दर्द या पेशाब कम आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। विशेषज्ञ फ्लू से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराने की भी सलाह देते हैं।

मानसून में बच्चों की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये उपाय

  • बाहर जाते समय बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं।
  • मच्छरों से बचाव के लिए उपयुक्त रिपेलेंट या स्प्रे का उपयोग करें।
  • बारिश में उपयुक्त जूते पहनाएं और भीगने के बाद पैरों को अच्छी तरह साफ करें।
  • एलर्जी से बचाव के लिए चादर, कंबल और अन्य घरेलू कपड़ों की नियमित सफाई करें।

 

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