बेटे पर झपटा गुलदार तो डंडा लेकर भिड़ गया पिता, 5 मिनट तक चला संघर्ष; जबड़े से छुड़ाकर बचाई जान

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बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक पिता ने अपनी जान की परवाह किए बिना गुलदार से भिड़कर बेटे की जिंदगी बचा ली। नजीबाबाद के मंडावली थाना क्षेत्र के मोथला उर्फ नीम वाली वन क्षेत्र में पशु चराने गए 33 वर्षीय रफी पर गुलदार ने अचानक हमला कर दिया। बेटे की चीख सुनकर करीब 250 मीटर दूर स्थित डेरे से उसके 65 वर्षीय पिता गुलाम नबी डंडा लेकर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने गुलदार का सामना करते हुए करीब पांच मिनट तक संघर्ष किया। आखिरकार गुलदार रफी को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। हमले में रफी के हाथ और कंधे पर चोट आई है।

पशु चराने जंगल जा रहा था युवक, तभी गुलदार ने दबोचा

रफी अपने परिवार के साथ मोथला उर्फ नीम वाली वन क्षेत्र में डेरा बनाकर रहते हैं। रविवार सुबह करीब आठ बजे वह गाय-भैंस चराने के लिए जंगल की ओर जा रहे थे। इसी दौरान घात लगाकर बैठे गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया।

गुलदार ने रफी को दबोच लिया। अपनी जान बचाने के लिए रफी ने शोर मचाना शुरू कर दिया। उसकी चीख सुनकर करीब 250 मीटर दूर मौजूद उसके पिता गुलाम नबी तुरंत डंडा लेकर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।

बेटे को गुलदार के कब्जे में देख डंडा लेकर टूट पड़े पिता

गुलाम नबी ने मौके पर पहुंचकर देखा कि गुलदार उनके बेटे पर हमला कर रहा है। उन्होंने बिना देर किए डंडे से गुलदार पर वार करना शुरू कर दिया। गुलदार ने कई बार घुर्राकर उन्हें डराने की कोशिश की, लेकिन पिता पीछे नहीं हटे।

गुलाम नबी लगातार गुलदार पर डंडे बरसाते रहे। करीब पांच मिनट तक दोनों के बीच संघर्ष चलता रहा। आखिरकार गुलदार रफी को छोड़कर जंगल की तरफ भाग गया।

हाथ और कंधे पर पंजों के निशान, अस्पताल में हुआ इलाज

गुलदार के हमले में रफी के हाथ और कंधे पर पंजों के वार से चोटें आई हैं। शरीर से खून निकलता देखकर परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल ग्राम प्रधान के पति नरवेल सिंह को सूचना दी। उन्होंने मौके पर पहुंचकर घायल रफी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।

सीएचसी में रफी का प्राथमिक उपचार किया गया। उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। रफी ने बताया कि यदि उसके पिता समय पर मौके पर नहीं पहुंचते तो उसकी जान बचना मुश्किल था।

वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को किया सतर्क

घटना की सूचना मिलने के बाद क्षेत्रीय वन अधिकारी विकास कुमार और वन दरोगा मोहित कुमार भी मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी और जंगल के आसपास सावधानी बरतने को कहा।

वन दरोगा मोहित कुमार ने बताया कि वन गुर्जर जंगल क्षेत्र में डेरों में रहकर पशुपालन करते हैं। उन्हें कई बार जंगल में न रहने की सलाह दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में क्षेत्र में पिंजड़ा लगाना संभव नहीं है।

डेरों के आसपास लंबे समय से घूम रहा गुलदार

पशुपालकों का कहना है कि यह गुलदार पिछले काफी समय से डेरों के आसपास दिखाई दे रहा है। इससे इलाके में रहने वाले लोगों में डर बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और गुलदार की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

ग्रामीण मुस्तफा, शमशेर, यामीन और गुलाम नबी समेत अन्य लोगों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में पशु चराने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था की जरूरत है।

 

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