नेशनल हाईवे पर अब जाम से पहले ही होगा इलाज, FASTag और वाहन डेटा से 2-3 साल पहले बनेगी चौड़ीकरण की योजना
नई दिल्ली: देश में नेशनल हाईवे के निर्माण और यातायात प्रबंधन का तरीका अब बदलने की तैयारी है। सरकार हाईवे पर लगने वाले लंबे जाम और बढ़ते ट्रैफिक दबाव का इंतजार करने के बजाय पहले से ही तैयारी करेगी। इसके लिए FASTag और वाहन डेटाबेस से मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। किसी हाईवे पर वाहनों का दबाव बढ़ने के संकेत मिलने पर जाम की गंभीर स्थिति बनने से 2 से 3 साल पहले ही चौड़ीकरण, बाईपास या एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना शुरू की जा सकेगी।
FASTag सिर्फ टोल वसूली तक सीमित नहीं रहेगा
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, FASTag से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल अब सिर्फ टोल वसूली के लिए नहीं किया जाएगा। इससे वाहनों की संख्या, ट्रैफिक पैटर्न और गाड़ियों की रफ्तार जैसे आंकड़ों का विश्लेषण कर भविष्य की सड़क जरूरतों का अनुमान लगाया जाएगा।
जब किसी हाईवे सेक्शन पर वाहनों की संख्या उसकी कुल क्षमता के 75 से 80 प्रतिशत तक पहुंचने लगेगी, तो डिजिटल सिस्टम स्वत: अलर्ट जारी करेगा। इसके आधार पर चौड़ीकरण, बाईपास या एलिवेटेड कॉरिडोर की जरूरत का आकलन किया जाएगा। इससे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और भूमि अधिग्रहण जैसे काम समय रहते शुरू किए जा सकेंगे।
त्योहारों में जाम से पहले मिलेगी वैकल्पिक रास्ते की जानकारी
त्योहारों, लंबे सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान टोल प्लाजा पर अचानक वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे समय में जाम की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एआई आधारित ट्रैफिक कंट्रोल रूम FASTag से मिलने वाले रुझानों का विश्लेषण करेगा।
सिस्टम पहले ही यह पहचानने की कोशिश करेगा कि किस टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतार लग सकती है। इसके बाद सड़क यात्रियों को टोल प्लाजा से करीब 20 से 30 किलोमीटर पहले वैकल्पिक मार्ग की जानकारी दी जाएगी। यह जानकारी राजमार्गयात्रा ऐप, गूगल मैप्स और हाईवे पर लगे परिवर्तनीय संदेश संकेतकों के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी।
मार्च 2027 तक बैरियर मुक्त होंगे टोल प्लाजा
पीक आवर्स में टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करने के लिए मल्टी-लेन फ्री फ्लो और स्वचालित नंबर प्लेट पहचान आधारित बैरियर-मुक्त व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत वाहनों को टोल क्षेत्र में बिना रुके 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरने की सुविधा देने की तैयारी है।
सड़क परिवहन मंत्रालय, एनएचएआई, संबंधित अधिकारियों और गति शक्ति सेल की संयुक्त समीक्षा बैठक में इस डिजिटल रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया है। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक टोल व्यवस्था को बैरियर-मुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है।
