रुपए की गिरावट पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सफाई, बोलीं- बाजार में स्थिरता के लिए कदम उठाता रहेगा RBI

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नई दिल्ली: भारतीय रुपए में गिरावट और विदेशी मुद्रा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का मकसद रुपए को किसी खास विनिमय दर पर बनाए रखना नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित कारोबार सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक परिस्थितियों से रुपए पर पड़ रहे दबाव को कम करने और बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए केंद्रीय बैंक आगे भी जरूरी कदम उठाता रहेगा।

दिल्ली में मंगलवार को आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में वित्त मंत्री ने कहा कि RBI नियामक उपायों के जरिए रुपए में स्थिरता बनाए रखने और विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को कम करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब रुपए में हालिया गिरावट के बाद केंद्रीय बैंक ने बाजार को संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं।

RBI ने रुपए को सहारा देने के लिए उठाए कई कदम

रुपए पर दबाव कम करने के लिए RBI ने अक्टूबर में कई महत्वपूर्ण उपाय किए। इनमें सरकारी तेल विपणन कंपनियों के लिए डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने को विशेष सुविधा शुरू करना, रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों की दोबारा बुकिंग के नियम सख्त करना और वास्तविक अंतर्निहित जोखिम के बिना किए जाने वाले कुछ डेरिवेटिव सौदों की सीमा घटाना शामिल है।

केंद्रीय बैंक ने ऐसे कुछ लेनदेन की सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी थी। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को सीमित करना और रुपए में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण रखना था।

डॉलर के मुकाबले रुपए में दर्ज हुई मजबूती

रिपोर्ट के मुताबिक, RBI के उपायों से विदेशी मुद्रा बाजार को सहारा मिला और रुपया मजबूत होकर 94.50 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, मंगलवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 77 पैसे मजबूत होकर 95.05 प्रति डॉलर पर पहुंचा।

रुपए की चाल पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और विदेशी मुद्रा बाजार में होने वाले बदलावों का असर बना हुआ है। ऐसे में केंद्रीय बैंक के कदमों को बाजार में अत्यधिक अस्थिरता कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

राजकोषीय अनुशासन और विदेशी मुद्रा भंडार पर सरकार का जोर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार और नीति-निर्माताओं का ध्यान अर्थव्यवस्था के मजबूत व्यापक आर्थिक आधार को बनाए रखने पर है। इसके लिए राजकोषीय अनुशासन और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि रुपए में हालिया कमजोरी के पीछे ऐसे कई कारण हैं, जो भारत के सीधे नियंत्रण में नहीं हैं। वैश्विक आर्थिक हालात और बाहरी चुनौतियों का असर घरेलू मुद्रा पर पड़ रहा है।

सीतारमण के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में रुपए के मूल्य में काफी गिरावट आई है। इसे नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं, लेकिन मुद्रा की चाल को प्रभावित करने वाले ज्यादातर कारक देश के बाहर से जुड़े हुए हैं।

रुपए के लिए कोई निश्चित स्तर तय करना RBI का लक्ष्य नहीं

वित्त मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि RBI की रणनीति रुपए को किसी निर्धारित विनिमय दर पर बनाए रखने के बजाय विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित कारोबार सुनिश्चित करने और अत्यधिक अस्थिरता को कम करने पर केंद्रित है।

केंद्रीय बैंक जरूरत के मुताबिक नियामक कदम उठाता रहेगा, ताकि बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सके। आने वाले समय में रुपए की चाल पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के साथ-साथ RBI के नीतिगत फैसलों का भी असर पड़ सकता है।

 

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