साहिल वाकोडे की मौत के बाद IIT बॉम्बे सख्त, अब छात्र एक-दूसरे से नहीं पूछ सकेंगे जाति, एडमिशन कैटेगरी और JEE रैंक
साहिल वाकोडे की मौत के बाद कैंपस में विरोध प्रदर्शन
आईआईटी बॉम्बे के बीटेक सेकंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को कथित आत्महत्या से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद संस्थान में छात्रों के बीच आक्रोश देखने को मिला। साहिल के माता-पिता ने पवई पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई एफआईआर में कथित उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं।
घटना के बाद से संस्थान के मुख्य द्वार के पास छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल कुछ छात्रों ने इस जगह को ‘जस्टिस कॉर्नर’ नाम दिया है। उनकी मांग है कि कैंपस में भेदभाव और कथित उत्पीड़न की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स ने जारी की एंटी-डिस्क्रिमिनेशन गाइडलाइंस
लगातार विरोध और उठ रहे सवालों के बीच डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स की ओर से मंगलवार देर रात भेदभाव-विरोधी दिशानिर्देश जारी किए गए। संस्थान ने कहा कि कैंपस में ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए, जहां छात्र एक-दूसरे से उनकी जाति, धर्म, आर्थिक पृष्ठभूमि या प्रवेश श्रेणी के बजाय उनकी रुचियों, प्रतिभा, खेल और संगीत जैसे विषयों के आधार पर जुड़ें।
गाइडलाइंस में बताया गया है कि किसी छात्र से उसकी जेईई रैंक, GATE स्कोर या एडमिशन कैटेगरी पूछना अनुचित हो सकता है। सवाल पूछने वाले का इरादा भले ही केवल जानकारी हासिल करना हो, लेकिन इससे सामने वाला छात्र असहज महसूस कर सकता है। प्रशासन के मुताबिक, रैंक और प्रवेश श्रेणी से जुड़े सवाल किसी छात्र की सामाजिक पृष्ठभूमि जानने की कोशिश के रूप में भी देखे जा सकते हैं और इससे कैंपस में भेदभाव की आशंका बढ़ सकती है।
जातिवादी और नफरत फैलाने वाले संदेशों पर भी सख्ती
संस्थान की गाइडलाइंस में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर साझा की जाने वाली सामग्री को लेकर भी चेतावनी दी गई है। ईमेल के मुताबिक, व्हाट्सऐप, फेसबुक और ईमेल जैसे माध्यमों पर जातिवादी, सेक्सिस्ट या नफरत फैलाने वाले संदेश और चुटकुले साझा करने से बचना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
हालांकि, प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों का कहना है कि केवल दिशानिर्देश जारी करने से कैंपस में भेदभाव की समस्या खत्म नहीं होगी। वे प्रशासन से इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और शिकायतों पर ठोस कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
छात्रों ने गाइडलाइंस को बताया महज औपचारिकता
प्रदर्शनकारी छात्रों ने नए ईमेल पर असंतोष जताते हुए इसे महज एक औपचारिक संदेश बताया है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से नियमों की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों की शिकायतों को सुनना और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाना भी जरूरी है।
छात्रों ने यह सवाल भी उठाया है कि गाइडलाइंस में फैकल्टी और स्टाफ की ओर से होने वाले संभावित भेदभाव का जिक्र होने के बावजूद निर्देशों का बोझ मुख्य रूप से छात्रों पर क्यों दिखाई देता है। उनकी मांग है कि शिक्षकों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए जाएं और प्रशासन प्रदर्शन कर रहे छात्रों से सीधे बातचीत करे।
दर्शन सोलंकी की मौत के बाद भी जारी हुई थीं ऐसी गाइडलाइंस
आईआईटी बॉम्बे में इस तरह के दिशानिर्देश पहले भी जारी किए जा चुके हैं। वर्ष 2023 में प्रथम वर्ष के छात्र दर्शन सोलंकी की मौत के बाद भी संस्थान ने भेदभाव रोकने के लिए इसी तरह की गाइडलाइंस जारी की थीं। दर्शन की मौत के बाद भी उनकी जेईई रैंक और सहपाठियों के व्यवहार को लेकर आरोप सामने आए थे।
अब साहिल वाकोडे की मौत के बाद लगभग इसी तरह के निर्देश दोबारा जारी किए जाने पर छात्र सवाल उठा रहे हैं कि पहले के उपायों से कैंपस के माहौल में कितना बदलाव आया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भेदभाव रोकने के लिए केवल ईमेल या दिशानिर्देश पर्याप्त नहीं हैं। उनकी मांग है कि संस्थान शिकायतों के निपटारे, जवाबदेही और नियमों के वास्तविक क्रियान्वयन पर ध्यान दे।
