राजस्थान में MBBS-BDS की 1,217 सीटें खाली, 1.46 करोड़ तक फीस बनी वजह? यूपी का रुख कर रहे छात्र
एमबीबीएस की 1,078 और बीडीएस की 139 सीटें खाली
राजस्थान में स्टेट कोटे के तहत नीट यूजी 2026 काउंसलिंग के तीन राउंड के बाद कुल 1,217 सीटें खाली हैं। इनमें 88.6 प्रतिशत यानी 1,078 सीटें एमबीबीएस की हैं, जबकि 11.4 प्रतिशत यानी 139 सीटें बीडीएस की हैं।
एमबीबीएस की खाली सीटों की संख्या पहले 1,039 थी। राउंड-3 में आवंटन के बाद रिपोर्टिंग नहीं करने वाले अभ्यर्थियों के कारण 39 सीटें और खाली हो गईं। अब इन सीटों को स्ट्रे वैकेंसी राउंड के जरिए भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
नीट यूजी 2026 काउंसलिंग के चेयरमैन डॉ. बी.एल. कुमावत के अनुसार, स्ट्रे वैकेंसी राउंड का कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। इसमें भाग लेने वाले अभ्यर्थियों को निर्धारित समय के भीतर अपने दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराना होगा।
राजस्थान नीट यूजी स्ट्रे वैकेंसी राउंड का पूरा शेड्यूल
- 16 अक्टूबर: अस्थायी रिक्त सीटों की सूची जारी
- 16 से 17 अक्टूबर: ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा करना
- 18 से 20 अक्टूबर: एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर में मूल दस्तावेजों का ऑफलाइन सत्यापन और बॉन्ड जमा करना
- 19 से 21 अक्टूबर: सिक्योरिटी राशि जमा करना
- 19 से 21 अक्टूबर: ऑनलाइन चॉइस फिलिंग
- 20 अक्टूबर: अस्थायी संयुक्त मेरिट सूची जारी
- 22 अक्टूबर: अस्थायी सीट आवंटन परिणाम जारी
- 22 से 26 अक्टूबर: आवंटित कॉलेज में रिपोर्टिंग और दस्तावेज जमा करना
राजस्थान के बजाय यूपी क्यों जा रहे हैं छात्र?
मेडिकल शिक्षा से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान के निजी और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में फीस अधिक होने के कारण सीटें खाली रह सकती हैं। इसके चलते कई विद्यार्थी उत्तर प्रदेश के कॉलेजों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यूपी के निजी और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में फीस तुलनात्मक रूप से कम होने से अभ्यर्थियों को आर्थिक रूप से राहत मिल सकती है।
हालांकि, कॉलेज और कोटे के अनुसार फीस में अंतर होता है। इसलिए दाखिले का निर्णय लेते समय विद्यार्थियों को संबंधित कॉलेज की आधिकारिक फीस, अन्य शुल्क और प्रवेश संबंधी शर्तों की जानकारी लेनी चाहिए।
राजस्थान में MBBS की फीस 1.46 करोड़ रुपये तक
राजस्थान में जनरल कोटे के तहत निजी या डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस लगभग 85.05 लाख रुपये से 1.08 करोड़ रुपये तक बताई गई है। वहीं, मैनेजमेंट कोटे में यह राशि करीब 1.13 करोड़ से 1.46 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है।
जनरल और मैनेजमेंट कोटे की फीस में लगभग 25 से 30 प्रतिशत का अंतर बताया गया है। कुछ मामलों में यह अंतर 27 लाख से 40 लाख रुपये तक हो सकता है। इतनी अधिक फीस के कारण मेडिकल की पढ़ाई का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ा सवाल बन जाता है। ऐसे में छात्र दूसरे राज्यों के कॉलेजों में उपलब्ध सीटों और फीस की तुलना करके विकल्प तलाश रहे हैं।
