EMI घटेगी या बढ़ेगी? RBI आज रेपो रेट पर सुनाएगा बड़ा फैसला, लोन लेने वालों की टिकी नजर
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन से चल रही बैठक का आज बुधवार को आखिरी दिन है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 7 अक्टूबर की सुबह 10 बजे समिति के फैसलों का ऐलान करेंगे। सबसे ज्यादा नजर रेपो रेट पर रहेगी, क्योंकि इसमें बदलाव का सीधा असर होम लोन, कार लोन और दूसरी कर्ज की ब्याज दरों के साथ ईएमआई पर पड़ सकता है।
अगर आरबीआई रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है तो मौजूदा 5.25 प्रतिशत की दर बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो सकती है। हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का अनुमान है कि अक्टूबर में आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है और दिसंबर से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो सकता है।
महंगाई और कच्चे तेल की बढ़ती कीमत पर RBI की नजर
आरबीआई के सामने इस समय महंगाई और कच्चे तेल की कीमत बड़ी चुनौती बनी हुई है। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमत, रुपये की कमजोरी और दुनियाभर में बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने भी केंद्रीय बैंक की चिंता बढ़ाई है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी है, जबकि रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार कर गया है। ऐसे माहौल में ब्याज दरों को लेकर आरबीआई का फैसला महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
ज्यादातर विशेषज्ञ 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ोतरी के पक्ष में
कई अनुमानों में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में अब काफी हद तक 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद शामिल हो चुकी है। ऐसे में आज के फैसले के साथ आरबीआई की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर दिशा और गवर्नर संजय मल्होत्रा की टिप्पणी भी बेहद महत्वपूर्ण होगी।
बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि आरबीआई आगे ब्याज दरों को लेकर किस तरह का संकेत देता है और महंगाई, कच्चे तेल तथा रुपये की स्थिति को देखते हुए आने वाली बैठकों के लिए क्या रुख अपनाता है।
मदन सबनवीस का अनुमान- दिसंबर से शुरू हो सकता है बढ़ोतरी का दौर
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि आरबीआई अक्टूबर में दरों में बदलाव किए बिना एक और बैठक तक इंतजार कर सकता है। उनके मुताबिक, इससे सितंबर-अक्टूबर की महंगाई, खरीफ फसल और त्योहारी मांग की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने का समय मिलेगा।
सबनवीस के अनुमान के अनुसार दिसंबर से 25 बेसिस प्वाइंट की तीन बढ़ोतरी हो सकती हैं। दिसंबर और फरवरी के बाद अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में एक और बढ़ोतरी की संभावना के साथ रेपो रेट कुल 75 बेसिस प्वाइंट बढ़कर करीब 6 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त पैसा भी RBI के लिए चुनौती
सबनवीस के मुताबिक बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता करीब 12 लाख करोड़ रुपये से घटकर 5-6 लाख करोड़ रुपये रह गई है, लेकिन इसके दोबारा बढ़ने की संभावना है। ऐसे में तत्काल ब्याज दर बढ़ाने का असर मौद्रिक नीति के सभी हिस्सों पर एक साथ दिखाई देने में समय लग सकता है, खासकर जमा दरों पर इसका असर धीरे-धीरे पहुंच सकता है।
अब आरबीआई के सामने मोटे तौर पर दो संभावनाएं हैं। पहली, आज ही 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सख्त रुख अपनाना और दूसरी, अक्टूबर में दरों को स्थिर रखते हुए दिसंबर से बढ़ोतरी शुरू करना। आरबीआई का फैसला आने के बाद यह भी साफ होगा कि आने वाले महीनों में कर्ज की ब्याज दरों और ईएमआई को लेकर तस्वीर किस दिशा में जाती है।
