SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, राहुल गांधी समेत विपक्ष ने उठाए वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर सवाल
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने की मांग भी की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, समिति को निर्धारित समयसीमा के भीतर SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और किए गए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट करना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी भी मतदाता का नाम कानून के तहत नोटिस दिए बिना और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। इस मांग के जरिए मतदाता सूची में पारदर्शिता और पात्र नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की अपील
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि मामले में अंतिम फैसला आने तक विभिन्न राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए। उनका तर्क है कि इससे पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रखने और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों के पात्र नागरिकों को कानून के तहत निर्धारित अंतिम तारीख तक मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने का अवसर देने की मांग भी की गई है।
खरगे, अखिलेश और तेजस्वी समेत कई विपक्षी नेता शामिल
राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी याचिका में सह-याचिकाकर्ता हैं। इनके अलावा तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले भी याचिका में शामिल हैं।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस मामले में याचिका दाखिल की है।
चुनाव आयोग से दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मांगने की अपील
याचिका में भारत निर्वाचन आयोग को SIR से जुड़े विवादित फैसलों की पूरी फाइलें, बैठकों के एजेंडे, कार्यवाही का विवरण, अधिकारियों की टिप्पणियां और दर्ज आपत्तियां अदालत में पेश करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
इसके साथ ही इलेक्शन कमीशन इन्फॉर्मेशन नेटवर्क (ECINET) और इलेक्टोरल रोल ऑफिसर्स नेटवर्क (ERONET) के एक्सेस लॉग उपलब्ध कराने की अपील भी की गई है। याचिकाकर्ताओं ने 24 जून 2025 को देशभर में SIR शुरू करने के फैसले से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने की मांग की है।
SIR से जुड़े फैसलों की कानूनी वैधता जांचने की मांग
याचिका में यह जांच कराने का अनुरोध किया गया है कि SIR से संबंधित विवादित फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुरूप लिए गए थे या नहीं।
याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि यदि कोई फैसला कानूनी अधिकार के बिना लिया गया है, तो उसे रद्द किया जाना चाहिए। संविधान का अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची तैयार कराने और चुनावों के संचालन की निगरानी, निर्देशन तथा नियंत्रण की जिम्मेदारी देता है।
बूथवार नाम हटाने का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग
याचिका में निर्वाचन आयोग को SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथवार सूची सार्वजनिक करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके साथ ही प्रत्येक नाम हटाने का कारण बताने और उम्र तथा लिंग के आधार पर हटाए गए नामों का विवरण जारी करने की अपील की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने उन मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग भी की है, जो जांच के बाद मतदाता सूची में शामिल होने के पात्र पाए जाते हैं।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की पीठ 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन से संबंधित अलग-अलग याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी। ये मामले मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने, रेल सेवाओं में व्यवधान और अन्य घटनाओं से जुड़े हैं।
दिल्ली में SIR के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग के साथ कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन घटनाओं से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत के रुख पर भी नजर रहेगी।
