West Bengal Assembly Elections 2026: राजगंज सीट पर TMC का दबदबा, क्या इस बार बदलेगा सियासी समीकरण?

पश्चिम बंगाल की राजगंज विधानसभा सीट जलपाईगुड़ी जिले का अहम राजनीतिक क्षेत्र है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और जलपाईगुड़ी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। कभी वामपंथ का अभेद्य गढ़ रही यह सीट अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत किला मानी जाती है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यहां का सियासी तापमान एक बार फिर चढ़ने लगा है।
वामपंथ से TMC तक: कैसे बदली राजनीतिक तस्वीर
राजगंज सीट पर 1977 से 2006 तक लगातार Communist Party of India (Marxist) का कब्जा रहा। धीरेंद्र नाथ रॉय और जोतिंद्र नाथ रॉय जैसे नेताओं ने यहां वाम मोर्चे को मजबूत आधार दिया। लेकिन 2009 के उपचुनाव ने दशकों पुरानी राजनीति को पलट दिया।
तृणमूल कांग्रेस के खगेश्वर रॉय ने पहली बार जीत दर्ज कर वामपंथी गढ़ में सेंध लगा दी। इसके बाद 2011, 2016 और 2021 में लगातार जीत के साथ उन्होंने इस सीट को TMC के सुरक्षित क्षेत्र में बदल दिया।
2021 विधानसभा चुनाव परिणाम
2021 के चुनाव में खगेश्वर रॉय ने एक बार फिर अपनी पकड़ साबित की।
खगेश्वर रॉय (TMC): 1,04,641 वोट (49.22%)
सुपेन रॉय (BJP): 88,868 वोट (41.80%)
रतन रे (CPI-M): 12,108 वोट (5.69%)
यह मुकाबला सीधा TMC और BJP के बीच सिमटता दिखा, जबकि वाम दल तीसरे स्थान पर खिसक गए।
2011 विधानसभा चुनाव परिणाम

2011 में भी TMC ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी।
खगेश्वर रॉय (TMC): 74,546 वोट (46.64%)
अमूल्य चंद्र रॉय (CPI-M): 67,526 वोट (42.25%)
सुपेन रॉय (BJP): 8,038 वोट (5.03%)
यह वह दौर था जब राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC का उदय हो रहा था और वामपंथ का क्षरण शुरू हो चुका था।
जनसांख्यिकी और निर्णायक फैक्टर
राजगंज में लगभग 2.34 लाख पंजीकृत मतदाता हैं। यहां अनुसूचित जाति समुदाय की आबादी करीब 50% मानी जाती है, जो चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाती है। इसके अलावा चाय बागान श्रमिकों की बड़ी आबादी भी यहां रहती है। मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, भूमि अधिकार और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे हर चुनाव में केंद्र में रहते हैं।
2026 में क्या बदलेगा समीकरण?
हालांकि पिछले चार चुनावों से TMC यहां मजबूत स्थिति में है, लेकिन BJP ने 2021 में वोट प्रतिशत बढ़ाकर कड़ा मुकाबला पेश किया था। ऐसे में 2026 में मुकाबला दिलचस्प होने की पूरी संभावना है। क्या BJP या वाम दल वापसी कर पाएंगे, या फिर खगेश्वर रॉय पांचवीं बार जीत दर्ज कर इतिहास बनाएंगे — यह देखना दिलचस्प होगा।
