चक्रवात अर्नब का आंध्र प्रदेश तट पर लैंडफॉल, 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं

Cyclone
नई दिल्ली: चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र में दस्तक दी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, तूफान का लैंडफॉल दोपहर करीब 1:20 बजे शुरू हुआ। काकीनाडा के पास, यनम के दक्षिण में बापटला से विशाखापट्टनम के बीच इसका असर देखा गया। इस दौरान हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि तेज झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे। तूफान के कारण कई इलाकों में तेज बारिश, आंधी और जलभराव की स्थिति बनी। खबर के मुताबिक, करीब 84 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और राहत शिविर तैयार रखे गए हैं।

आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में नुकसान, पेड़ और छतें गिरीं

लैंडफॉल के बाद भी चक्रवात की तीव्रता बनी रही। आंध्र प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं के कारण घरों की छतें उखड़ने और पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। निचले इलाकों में समुद्री पानी घुसने से भी परेशानी बढ़ी। ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भी तेज हवाओं के साथ भारी बारिश जारी रही।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 32 हजार अधिकारियों के साथ की समीक्षा

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को चक्रवात से निपटने की तैयारियों और हालात की समीक्षा के लिए करीब 32,000 अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस की। इसमें जिला कलेक्टरों से लेकर जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारी शामिल हुए। अधिकारियों के अनुसार, अब तक जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं थी।

मुख्यमंत्री ने रातभर राहत और बचाव कार्यों में जुटे अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले से की गई तैयारियों से लोगों की जान बचाने में मदद मिली। साथ ही, उन्होंने निर्देश दिया कि तूफान का प्रभाव कम होने और स्थिति सामान्य होने तक इसी तरह मुस्तैदी से काम जारी रखा जाए। कुछ जिलों में बारिश की तीव्रता घटने के बावजूद तेज हवाएं चलने की जानकारी दी गई।

नुकसान कम करने और बिजली-पानी बहाल करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम रखने और प्रभावित इलाकों में जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने को कहा। उन्होंने ऊर्जा, सिंचाई, सड़क और कृषि समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी स्थिति की समीक्षा की। फसलों को हुए नुकसान का आकलन तैयार करने और राज्य की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी केंद्र सरकार को देने के निर्देश दिए गए।

प्रशासन को गिरे हुए पेड़ दो घंटे के भीतर हटाने, बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने और राहत शिविरों में भोजन, पेयजल तथा चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा गया। इसके अलावा टैंकों और नहरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को सतर्क रखने के निर्देश भी दिए गए।

ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का असर

चक्रवात अर्नब का प्रभाव ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भी दिखाई दिया। गंजम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की खबर है। तेज हवाओं के चलते पेड़ झुक गए और कुछ स्थानों पर दीवारें गिरने की घटनाएं सामने आईं।

एक रिपोर्ट में पुरी जिले में पेड़ गिरने के कारण दीवार ढहने से एक महिला की मौत का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस घटना की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

ओडिशा में हजारों लोगों को सुरक्षित निकालने की तैयारी

ओडिशा सरकार ने चक्रवात के खतरे को देखते हुए करीब 48,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना बनाई थी। एहतियात के तौर पर 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए। चिल्का झील में नावों का संचालन भी स्थगित कर दिया गया।

प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी और अस्थायी राहत शिविर तैयार किए गए हैं। एनडीआरएफ और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें तैनात हैं। तटीय इलाकों में मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ज्यादातर नौकाएं सुरक्षित लौट आईं।

 

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