केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन पर बड़ा अपडेट! 40% तक रकम एकमुश्त लेने से लेकर 15 साल बाद पूरी पेंशन बहाली तक, जानें नए नियम
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए पेंशन कम्यूटेशन से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। सरकार ने पेंशन का एक हिस्सा एकमुश्त लेने से संबंधित नियमों को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें पेंशन का अधिकतम 40 फीसदी हिस्सा कम्यूट कराने, 15 साल बाद कटौती वाले हिस्से की बहाली, मेडिकल जांच और आवेदन की समय-सीमा से जुड़े प्रावधान स्पष्ट किए गए हैं। विभागीय जांच या अदालत में मामला लंबित होने की स्थिति में पेंशन कम्यूट कराने के नियम भी बताए गए हैं।
पेंशन का 40 फीसदी हिस्सा एकमुश्त लेने का नियम
केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन कम्यूटेशन) नियम, 1981 के नियम 5 के तहत सरकारी कर्मचारी अपनी मासिक पेंशन का अधिकतम 40 फीसदी हिस्सा एकमुश्त रकम के रूप में ले सकते हैं। कर्मचारी चाहें तो 40 फीसदी से कम हिस्से का भी कम्यूटेशन करा सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक पेंशन 50,000 रुपये है और वह इसका 40 फीसदी कम्यूट कराता है, तो 20,000 रुपये मासिक पेंशन के बदले उसे एकमुश्त राशि मिलेगी। इसके बाद उसकी मासिक बेसिक पेंशन घटकर 30,000 रुपये रह जाएगी। एकमुश्त मिलने वाली रकम कर्मचारी की उम्र, कम्यूट की गई पेंशन और निर्धारित कम्यूटेशन फैक्टर के आधार पर तय होती है।
15 साल बाद बहाल हो जाएगा पेंशन का कटा हुआ हिस्सा
पेंशन कम्यूट कराने के बाद हर महीने मिलने वाली पेंशन में हुई कटौती स्थायी नहीं होती। नियम 10-A के अनुसार, कम्यूटेशन की कटौती लागू होने की तारीख से 15 साल पूरे होने पर कम्यूट किया गया पेंशन हिस्सा बहाल कर दिया जाता है।
इसे उदाहरण से समझें तो 50,000 रुपये की बेसिक पेंशन में से 20,000 रुपये कम्यूट कराने पर कर्मचारी को शुरुआत में 30,000 रुपये मासिक बेसिक पेंशन मिलेगी। निर्धारित 15 साल पूरे होने के बाद कम्यूट किया गया हिस्सा बहाल होने पर बेसिक पेंशन फिर 50,000 रुपये हो जाएगी। इस अवधि की गणना हर मामले में रिटायरमेंट की तारीख से नहीं, बल्कि पेंशन में कटौती लागू होने की तारीख से की जाती है।
किन कर्मचारियों को मेडिकल जांच से मिल सकती है छूट?
नियम 12 के तहत कुछ श्रेणियों के पेंशनर्स को बिना मेडिकल जांच पेंशन कम्यूट कराने की सुविधा मिल सकती है। इनमें सामान्य सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली सुपरएनुएशन पेंशन, रिटायरिंग पेंशन, सरकारी कंपनी या निगम में समायोजन के बाद मिलने वाली पेंशन और कुछ मुआवजा पेंशन के मामले शामिल हैं।
सामान्य रिटायरमेंट के मामलों में कर्मचारी को निर्धारित फॉर्म में सेवानिवृत्ति के एक साल के भीतर आवेदन करना होता है। संबंधित नियमों और शर्तों को पूरा करने पर विभागीय या न्यायिक कार्रवाई समाप्त होने के बाद स्वीकृत पेंशन के मामले में भी बिना मेडिकल जांच कम्यूटेशन की सुविधा मिल सकती है।
कब करानी पड़ सकती है मेडिकल जांच?
कुछ परिस्थितियों में पेंशन कम्यूट कराने के लिए मेडिकल जांच जरूरी हो सकती है। इनमें अमान्य पेंशन (Invalid Pension), सजा के तौर पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन और अनुकंपा भत्ता (Compassionate Allowance) के मामले शामिल हैं।
इसके अलावा, निर्धारित एक साल की अवधि बीतने के बाद आवेदन करने वाले कर्मचारियों को भी मेडिकल जांच करानी पड़ सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित मेडिकल अथॉरिटी से फिट घोषित होने के बाद ही कम्यूटेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
विभागीय जांच या कोर्ट केस लंबित होने पर क्या है नियम?
यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच या न्यायिक कार्रवाई चल रही है और उसे प्रोविजनल पेंशन मिल रही है, तो इस अवधि में वह पेंशन कम्यूट नहीं करा सकता। कार्रवाई पूरी होने और नियमित पेंशन का आदेश जारी होने के बाद कर्मचारी नियम 13 के तहत आवेदन कर सकता है।
यदि पेंशन मंजूरी के आदेश की तारीख से एक साल के भीतर हेड ऑफ ऑफिस को आवेदन मिल जाता है, तो मेडिकल जांच की जरूरत नहीं होगी। निर्धारित अवधि के बाद आवेदन करने पर मेडिकल जांच कराना अनिवार्य हो सकता है।
एकमुश्त रकम की गणना किस तारीख से होगी?
पेंशन कम्यूटेशन के तहत मिलने वाली एकमुश्त रकम की गणना प्रभावी तारीख के आधार पर की जाती है। रिटायरमेंट के बाद आवेदन करने वाले कर्मचारी के मामले में हेड ऑफ ऑफिस को फॉर्म-1 मिलने की तारीख महत्वपूर्ण होती है।
पात्र प्री-रिटायरमेंट आवेदन के मामले में सेवानिवृत्ति के अगले दिन को प्रभावी तारीख माना जाएगा। वहीं, जहां मेडिकल जांच आवश्यक है, वहां मेडिकल अथॉरिटी की ओर से फॉर्म-4 के पार्ट-3 में रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किए जाने की तारीख को आधार बनाया जाएगा। एकमुश्त रकम की गणना के लिए उसी तारीख पर लागू कम्यूटेशन टेबल का इस्तेमाल किया जाता है।
रिटायरमेंट से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सेवानिवृत्ति की तैयारी कर रहे कर्मचारियों को पेंशन कम्यूटेशन का विकल्प चुनने से पहले अपनी पेंशन श्रेणी, आवेदन की समय-सीमा और मेडिकल जांच से जुड़े प्रावधानों को समझना चाहिए। पेंशन का हिस्सा एकमुश्त लेने पर हर महीने मिलने वाली बेसिक पेंशन कम हो जाती है, इसलिए फैसला करने से पहले मौजूदा आर्थिक जरूरतों और भविष्य के खर्चों का आकलन करना जरूरी है।
नियमों के तहत अधिकतम 40 फीसदी पेंशन कम्यूट कराने और 15 साल बाद कम्यूट किए गए हिस्से की बहाली का प्रावधान है। हालांकि, व्यक्तिगत मामले में लागू शर्तों और प्रभावी तारीख की पुष्टि संबंधित पेंशन नियमों के अनुसार करनी चाहिए।
