दून अस्पताल में मरीजों को बड़ी राहत, हफ्ते में 5 दिन चलेगी न्यूरो ओपीडी; बिलिंग सुविधा भी 12 घंटे
देहरादून: उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल दून अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब यहां सप्ताह में पांच दिन न्यूरो ओपीडी चलेगी, जबकि भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों की परेशानी कम करने के लिए बिलिंग काउंटर का समय बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया गया है। अस्पताल प्रशासन का उद्देश्य मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ ही अनावश्यक भागदौड़ और भीड़ को कम करना है।
मंगलवार से शनिवार तक मिलेगी न्यूरो विशेषज्ञों की सुविधा
दून अस्पताल में अब न्यूरो ओपीडी मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को संचालित होगी। इससे पहले सप्ताह में कम दिन ओपीडी चलने के कारण मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लेने के लिए इंतजार करना पड़ता था। मरीजों की बढ़ती संख्या और उनकी परेशानी को देखते हुए ओपीडी के दिनों में बढ़ोतरी की गई है।
न्यूरो विभागाध्यक्ष डॉ. डीपी तिवारी, डॉ. अमित कुमार और हाल ही में अस्पताल से जुड़े डॉ. उदय गुप्ता ओपीडी में मरीजों को देखेंगे। पंजीकरण प्रभारी एवं जनसंपर्क अधिकारी विनोद नैनवाल ने बताया कि नया कार्यक्रम तय कर लिया गया है और जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर दी गई हैं। प्राचार्य प्रो. डॉ. गीता जैन ने कहा कि मरीजों का हित अस्पताल की प्राथमिकता है।
भर्ती मरीजों के लिए सुबह 8 से रात 8 बजे तक बिलिंग
दून अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों को बिल बनवाने के लिए अलग-अलग भवनों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के निर्देश पर प्राचार्य डॉ. गीता जैन और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार कर रहे हैं।
पुरानी बिल्डिंग में बिलिंग काउंटर अब सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक संचालित होगा। यह व्यवस्था गुरुवार से शुरू कर दी गई है। पहले बिलिंग काउंटर सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक ही चलता था। समय बढ़ने से भर्ती मरीजों, डायलिसिस कराने वालों और रेडियोलॉजी जांच के लिए आने वाले लोगों को बिल बनवाने के लिए ओपीडी या इमरजेंसी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इससे इन जगहों पर भीड़ कम करने में भी मदद मिलेगी। इमरजेंसी में सेंट्रल लैब खोलने के लिए भी जगह चिन्हित की जा रही है।
कमीशन के आरोपों पर निदेशालय करेगा जांच
दून मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के दो कर्मचारियों पर कमीशन लेने के आरोपों और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने मामले की पड़ताल के लिए संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी की अगुवाई में समिति बनाई है। प्राचार्य डॉ. गीता जैन से भी रिपोर्ट मांगी गई है।
जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और आरोपों के घेरे में आए कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। आरोप लगाने वाले अधिवक्ता को भी अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया जा रहा है। जांच के बाद मामले से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।
10 अक्टूबर तक पार्किंग स्टीकर लेना जरूरी
दून अस्पताल में पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए वाहनों पर स्टीकर लगाना अनिवार्य किया गया है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट ने निर्देश दिए हैं कि वाहन चालक 10 अक्टूबर तक ओपीडी समन्वयक विनोद नैनवाल से स्टीकर प्राप्त कर लें। तय समय के बाद बिना स्टीकर वाले वाहनों को अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
अस्पताल परिसर में मलबा देखकर अफसर नाराज
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट और उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनम्र मित्तल ने अस्पताल की तीनों इमारतों का निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगह मलबा पड़ा मिलने पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अनुभागों और राष्ट्रीय अस्पताल प्रत्यायन बोर्ड के तहत गठित समितियों के जिम्मेदारों को तत्काल मलबा हटवाने के निर्देश दिए।
