फिश ऑयल नहीं खाते हैं तो डाइट में शामिल करें ये 4 चीजें, ओमेगा-3 की कमी पूरी करने में करेंगी मदद

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नई दिल्ली: अच्छी सेहत के लिए संतुलित खानपान जरूरी है। आमतौर पर लोग अपनी डाइट में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन जैसे पोषक तत्वों को शामिल करने पर ध्यान देते हैं, लेकिन ओमेगा-3 फैटी एसिड को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यह शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में शामिल है। दिल को स्वस्थ रखने, दिमाग के सामान्य कामकाज और आंखों की सेहत बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका होती है। मछली और फिश ऑयल को ओमेगा-3 का प्रमुख स्रोत माना जाता है, लेकिन शाकाहारी लोगों के लिए भी इसके कई अच्छे विकल्प मौजूद हैं।

ओमेगा-3 एक प्रकार का पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड है। इसे जरूरी फैटी एसिड कहा जाता है, क्योंकि शरीर इसका पर्याप्त उत्पादन खुद नहीं कर पाता। इसलिए भोजन के जरिए इसकी पूर्ति करना जरूरी होता है। ओमेगा-3 के प्रमुख प्रकारों में एएलए यानी अल्फा लिनोलेनिक एसिड, ईपीए और डीएचए शामिल हैं। एएलए मुख्य रूप से पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, जबकि ईपीए और डीएचए मछली तथा समुद्री खाद्य पदार्थों में अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। शरीर एएलए के कुछ हिस्से को ईपीए और डीएचए में बदल सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया सीमित होती है।

दिल और दिमाग के लिए क्यों जरूरी है ओमेगा-3

ओमेगा-3 फैटी एसिड को हृदय की सेहत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर ईपीए और डीएचए ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा ये मस्तिष्क की कोशिकाओं की संरचना और उनके सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाते हैं। डीएचए आंखों के रेटिना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में शरीर में इसकी पर्याप्त मात्रा आंखों और दिमाग के सामान्य विकास के लिए जरूरी मानी जाती है।

गर्भावस्था के दौरान भी ओमेगा-3 का विशेष महत्व होता है। गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क और आंखों के विकास में डीएचए की भूमिका होती है। इसके साथ ही ओमेगा-3 शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। कुछ अध्ययनों में इसे जोड़ों की सूजन और गठिया से जुड़ी परेशानियों में संभावित लाभ से भी जोड़ा गया है।

अलसी के बीज हैं ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत

शाकाहारी लोगों के लिए अलसी ओमेगा-3 का अच्छा विकल्प है। इसमें एएलए पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। अलसी के बीजों को हल्का भूनकर या पीसकर भोजन में शामिल किया जा सकता है। पिसी हुई अलसी को आटे, दही या दलिया में मिलाकर खाना भी आसान तरीका है। साबुत बीजों के मुकाबले पिसी हुई अलसी से पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर हो सकता है।

चिया सीड्स से भी मिलेगी पोषण की खुराक

चिया सीड्स में ओमेगा-3 के साथ फाइबर और कई अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इन्हें पानी में भिगोकर या दही, स्मूदी और ओट्स के साथ खाया जा सकता है। इनमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाए रखने में भी मदद कर सकता है। हालांकि, चिया सीड्स का सेवन संतुलित मात्रा में और पर्याप्त पानी के साथ करना चाहिए।

अखरोट और सोयाबीन को भी करें शामिल

अखरोट शाकाहारी लोगों के लिए ओमेगा-3 का एक अच्छा स्रोत है। इसमें एएलए पाया जाता है। सीमित मात्रा में रोजाना अखरोट खाने से डाइट में अच्छे फैट शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा सोयाबीन और सोया ऑयल से भी एएलए मिलता है। इन खाद्य पदार्थों को नियमित भोजन का हिस्सा बनाकर ओमेगा-3 की जरूरत पूरी करने में मदद मिल सकती है।

क्या शाकाहारी लोगों को ओमेगा-3 सप्लीमेंट की जरूरत होती है?

अधिकतर लोगों के लिए संतुलित आहार के जरिए एएलए की जरूरत पूरी करना संभव है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं और कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों की ओमेगा-3 की जरूरत अलग हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर रहता है। शाकाहारी विकल्प के तौर पर समुद्री शैवाल यानी एल्गी से तैयार डीएचए और ईपीए सप्लीमेंट भी उपलब्ध हैं। बिना जरूरत या विशेषज्ञ की सलाह के फिश ऑयल अथवा अन्य सप्लीमेंट लेने की आवश्यकता नहीं होती।

इस तरह शाकाहारी लोगों को ओमेगा-3 के लिए मछली या फिश ऑयल पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। अलसी, चिया सीड्स, अखरोट और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थों को संतुलित डाइट में शामिल करके शरीर को जरूरी फैटी एसिड उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

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