फ्रांस में दिनभर सड़कों पर बवाल, रात होते ही बदल गया पेरिस का नजारा! मशालों और रंगीन झांकियों से जगमगाया नेशन स्क्वायर
नई दिल्ली: फ्रांस में गुरुवार को दिनभर विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का माहौल देखने को मिला। छात्र, कर्मचारी और आम नागरिक महंगाई, कम वेतन और शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। इस दौरान पेरिस और लियोन समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं। हालांकि, रात होते ही राजधानी पेरिस के नेशन स्क्वायर का नजारा पूरी तरह बदल गया। यहां रंग-बिरंगी झांकियां निकाली गईं और लोगों ने जलती मशालों के साथ रोशनी छोड़ने वाली फ्लेयर्स से आसमान को रोशन कर दिया। दिनभर तनाव के बीच रात का यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
नेशन स्क्वायर पर झांकियों और मशालों के साथ जुटे लोग
गुरुवार यानी 5 नवंबर की रात पेरिस के नेशन स्क्वायर पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। इस दौरान रंगीन झांकियां निकाली गईं और मशालें जलाकर प्रदर्शन किया गया। आसमान में चमकती रोशनी और फ्लेयर्स ने पूरे इलाके का नजारा बदल दिया।
इससे पहले दिन में फ्रांस के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन के दौरान तनाव की स्थिति बनी रही। पेरिस और लियोन में कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस से भिड़ंत हुई। प्रदर्शन खत्म होने के दौरान कुछ स्थानों पर आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं, जिन्हें अधिकारियों ने काबू में किया।
प्रदर्शनकारियों की संख्या पर सरकार और यूनियनों में बड़ा अंतर
फ्रांस में हुए राष्ट्रव्यापी आंदोलन में कितने लोग शामिल हुए, इसे लेकर सरकार और श्रमिक संगठनों के आंकड़ों में काफी अंतर सामने आया है।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में हुए प्रदर्शनों में करीब 6 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। वहीं, आंदोलन आयोजित करने वाली प्रमुख यूनियनों में शामिल सीजीटी ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की संख्या 16 लाख तक पहुंच गई थी।
ये प्रदर्शन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए थे। आंदोलन को समर्थन देने के लिए कुछ सरकारी कर्मचारियों ने एक दिन की हड़ताल भी की।
महंगाई, कम वेतन और शिक्षा बजट को लेकर नाराजगी
फ्रांस में जारी यह आंदोलन केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा। इसमें कर्मचारी, आम नागरिक और सेवानिवृत्त लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण, वेतन में बढ़ोतरी और शिक्षा व्यवस्था के लिए अधिक बजट उपलब्ध कराना शामिल है।
छात्रों का कहना है कि स्कूलों में बेहतर सुविधाएं दी जानी चाहिए और शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं, कर्मचारियों की मांग है कि वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी की जाए, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच उनका गुजारा आसान हो सके।
इस आंदोलन की शुरुआत सितंबर में एक हाईस्कूल में कर्मचारियों की कमी के विरोध से हुई थी। शुरुआत में छात्रों ने स्कूलों की स्थिति सुधारने और शिक्षा के लिए अधिक बजट देने की मांग उठाई थी। बाद में कर्मचारी भी आंदोलन से जुड़ते चले गए और देखते ही देखते विरोध कई शहरों तक फैल गया।
स्कूलों से लेकर सार्वजनिक परिवहन तक प्रभावित
फ्रांस में विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का असर शिक्षा व्यवस्था से लेकर सार्वजनिक परिवहन तक दिखाई दिया। देश के करीब एक तिहाई हाईस्कूल बंद रहे या सामान्य रूप से काम नहीं कर सके।
कुछ जगहों पर छात्रों ने स्कूलों के प्रवेश मार्ग बंद कर दिए, जबकि कई संस्थानों में शिक्षक हड़ताल पर रहे। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी कई इलाकों में प्रभावित हुईं। विरोध और हड़ताल के चलते पेरिस का एफिल टावर भी गुरुवार को बंद रहा।
आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि जब रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, तो वेतन और पेंशन में भी उसी हिसाब से बढ़ोतरी होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर छात्रों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों का विरोध फ्रांस के अलग-अलग शहरों में जारी है।
