यूपी में बदल गया चालान काटने का तरीका, अब घर बैठे कर सकेंगे चुनौती; 45 दिन की डेडलाइन तय, जवाब नहीं मिला तो रद्द होगा चालान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान काटने की व्यवस्था अब बदलने जा रही है। पुरानी ई-चालान प्रणाली से नए चालान काटने पर बुधवार रात से रोक लगा दी गई है। अब जल्द ही ‘नेक्स्ट-जेन ई-चालान 2.0’ प्रणाली के जरिए वाहनों के चालान किए जाएंगे। इसके साथ ही वाहन चालक घर बैठे ऑनलाइन अपने चालान को चुनौती भी दे सकेंगे।
पुरानी व्यवस्था में दर्ज लंबित चालानों और जरूरी अभिलेखों को नई प्रणाली में स्थानांतरित करने का काम शुरू कर दिया गया है। यातायात निदेशालय ने सभी जिलों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट और लोक अदालत से जुड़े मामलों की रसीदों का विवरण भी नई व्यवस्था में दर्ज करने को कहा गया है, ताकि पहले से दर्ज चालानों के निस्तारण में किसी तरह की परेशानी न आए।
चालानों का पूरा डेटा नई व्यवस्था में होगा ट्रांसफर
नई प्रणाली लागू करने से पहले पुरानी व्यवस्था में दर्ज चालानों से संबंधित डेटा और जरूरी दस्तावेजों को स्थानांतरित किया जा रहा है। निदेशालय ने कोर्ट और लोक अदालत से जुड़े पुराने रसीदों और निस्तारित मामलों का पूरा ब्योरा नई व्यवस्था में दर्ज करने की समयसीमा तय की थी।
इस प्रक्रिया का मकसद डेटा स्थानांतरण के दौरान पुराने चालानों के भुगतान या निस्तारण में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को रोकना है। नई व्यवस्था शुरू होने के बाद पुरानी प्रणाली से कोई नया चालान जारी नहीं किया जाएगा।
45 दिन के भीतर ऑनलाइन देनी होगी चुनौती
नई व्यवस्था में वाहन चालकों को गलत या फर्जी चालान के खिलाफ घर बैठे ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा मिलेगी। चालान जारी होने की तारीख से 45 दिन के भीतर इसकी चुनौती देनी होगी।
ऑनलाइन चुनौती मिलने के बाद शिकायत निस्तारण अधिकारी यानी ग्रेविएंस रिड्रेसल अफसर को 30 दिन के भीतर उस पर जवाब देना होगा। इस व्यवस्था के जरिए चालान से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण के लिए एक तय प्रक्रिया और समयसीमा निर्धारित की जा रही है।
30 दिन में जवाब नहीं तो स्वत: निरस्त होगा चालान
नए नियम के मुताबिक अगर ग्रेविएंस रिड्रेसल अफसर 30 दिन के भीतर चुनौती पर कोई जवाब नहीं देता है तो चालान स्वत: निरस्त माना जाएगा। वहीं, अगर अधिकारी चालान को सही ठहराता है तो संबंधित वाहन चालक को उसे जमा करने के लिए 120 दिन का समय मिलेगा।
इस अवधि के दौरान वाहन चालक चाहे तो आधी फीस जमा करके अदालत में भी जा सकता है। नई प्रणाली का उद्देश्य चालान को लेकर वाहन चालकों की आपत्तियों के निस्तारण के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और निर्धारित समयसीमा उपलब्ध कराना है।
