ईरान से बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा ऐलान, तेहरान की ओर रवाना हुआ एक और अमेरिकी जंगी बेड़ा

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न्यूयार्क: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी ने एक बार फिर मिडिल ईस्ट में हलचल तेज कर दी है। पहले ही अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन के ईरान के नजदीक पहुंचने के बीच अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने हालात और ज्यादा गंभीर बना दिए हैं। ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि एक और अमेरिकी जंगी बेड़ा तेहरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है।

ट्रंप ने बयान में कहा, “अभी एक और खूबसूरत आर्मडा ईरान की ओर बढ़ रहा है। मुझे उम्मीद है कि वे डील करेंगे।” राष्ट्रपति के इस बयान को सीधे तौर पर ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के बयान का किया समर्थन

राष्ट्रपति ट्रंप के इस रुख को अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर लिंडसे ग्राहम का खुला समर्थन मिला है। बुधवार को ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “मिस्टर प्रेसिडेंट, बहुत बढ़िया। ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों का साथ देते रहें। वे हमारे दोस्त हो सकते हैं। अयातुल्ला कभी हमारा दोस्त नहीं होगा।” ग्राहम का यह बयान अमेरिकी राजनीतिक हलकों में ईरान के खिलाफ सख्त रुख को और मजबूती देता नजर आया।

संभावित हमले की आशंका, अयातुल्ला अली खामेनेई बंकर में शिफ्ट

ईरान पर अमेरिका के संभावित सैन्य हमले की आशंका के बीच बड़ी खबर यह है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई राजधानी तेहरान में एक अंडरग्राउंड बंकर में चले गए हैं। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान उनके तीसरे बेटे मसूद खामेनेई ने उनके कार्यालय का रोजमर्रा का कामकाज संभाल लिया है। यह घटनाक्रम ईरान में हालात की गंभीरता को दर्शाता है।

प्रदर्शनों में मौतों के आंकड़ों पर विरोधाभास

ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर मौतों के आंकड़ों पर भी बड़ा अंतर सामने आया है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, अब तक कम से कम 6,159 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य के मारे जाने की आशंका जताई गई है। वहीं, ईरान सरकार ने इन आंकड़ों को खारिज करते हुए मृतकों की संख्या 3,117 बताई है।

ईरान में क्यों भड़के थे देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत बीते साल 28 दिसंबर के आसपास हुई थी, जब देश की मुद्रा रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी। जनवरी के पहले सप्ताह में ये प्रदर्शन और उग्र हो गए। इसके बाद सरकार की ओर से की गई सख्त कार्रवाई में हजारों लोगों की जान जाने की खबरें सामने आईं, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी।

 

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