क्यों पूरी दुनिया में मशहूर है कुंभलगढ़? इतिहास, शौर्य और प्रकृति का अद्भुत संगम बना विदेशी सैलानियों की पहली पसंद

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राजस्थान अपनी शान, शौर्य और विरासत के लिए विश्वभर में जाना जाता है, लेकिन अरावली की पहाड़ियों में बसा कुंभलगढ़ इन सबके बीच एक अलग पहचान रखता है। यह सिर्फ एक ऐतिहासिक किला नहीं, बल्कि राजपूताना गौरव, वीरता की गाथाओं और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि कुंभलगढ़ देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बना हुआ है।

36 किलोमीटर लंबी दीवार वाला ऐतिहासिक कुंभलगढ़ किला
कुंभलगढ़ किला अपनी विशाल और मजबूत दीवार के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। करीब 36 किलोमीटर लंबी यह दीवार एशिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार मानी जाती है, जिसकी तुलना अक्सर चीन की ग्रेट वॉल से की जाती है। 15वीं शताब्दी में मेवाड़ के प्रतापी शासक राणा कुंभा द्वारा निर्मित यह किला राजपूत स्थापत्य कला का बेमिसाल उदाहरण है। इतिहास में यह तथ्य भी दर्ज है कि महान योद्धा महाराणा प्रताप का जन्म इसी किले में हुआ था। अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अहमियत के चलते कुंभलगढ़ किले को वर्ष 2013 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।

किले के भीतर छिपा मेवाड़ का गौरवशाली अतीत
कुंभलगढ़ किले के भीतर बने महल और संरचनाएं राजपूत वैभव की कहानी बयां करती हैं। यहां मौजूद शाही कक्ष, प्राचीन भवन और संग्रहालय मेवाड़ के इतिहास को करीब से समझने का अवसर देते हैं। किले की ऊंची प्राचीर से आसपास फैली अरावली पर्वतमाला और घाटियों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

धार्मिक आस्था और कला का केंद्र
किले परिसर में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर और अन्य प्राचीन मंदिर धार्मिक और कलात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन मंदिरों की नक्काशी और वास्तुकला उस दौर की शिल्पकला की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है। यही वजह है कि इतिहास प्रेमियों के साथ-साथ श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य बढ़ाता है प्राकृतिक आकर्षण
कुंभलगढ़ सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं है। यहां स्थित कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य इसकी पहचान को और खास बनाता है। घने जंगल, पहाड़ी रास्ते, वन्य जीव और पक्षियों की कई प्रजातियां प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों को खासा आकर्षित करती हैं।

घूमने का सबसे सही समय
कुंभलगढ़ घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अनुकूल माना जाता है। इस दौरान मौसम ठंडा और सुहावना रहता है, जिससे किले और आसपास के इलाकों को आराम से देखा जा सकता है। गर्मियों में तापमान अधिक होने के कारण यात्रा थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

कुंभलगढ़ कैसे पहुंचें
कुंभलगढ़ तक पहुंचने के लिए हवाई, रेल और सड़क तीनों माध्यम उपलब्ध हैं। नजदीकी हवाई अड्डा उदयपुर है, जहां से लगभग 85 किलोमीटर की दूरी तय कर टैक्सी या निजी वाहन से कुंभलगढ़ पहुंचा जा सकता है। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए नाथद्वारा नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जो करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित है। सड़क मार्ग से उदयपुर, राजसमंद और आसपास के शहरों से नियमित बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।

कुल मिलाकर कुंभलगढ़ उन यात्रियों के लिए एक आदर्श पर्यटन स्थल है, जो इतिहास की वीर गाथाओं को महसूस करना चाहते हैं और साथ ही प्रकृति की गोद में शांति के कुछ पल बिताने की चाह रखते हैं।

 

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