क्या अब और सस्ता होगा लोन? आज से RBI की अहम मीटिंग, शुक्रवार को गवर्नर करेंगे ब्याज दरों पर बड़ा ऐलान

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नई दिल्ली। आम आदमी से लेकर कारोबार जगत तक की निगाहें एक बार फिर भारतीय रिजर्व बैंक पर टिक गई हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय द्विमासिक बैठक आज से शुरू हो रही है। यह बैठक ऐसे वक्त में हो रही है, जब केंद्र सरकार विकास-केंद्रित बजट पेश कर चुकी है, महंगाई काबू में है और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद वैश्विक अनिश्चितता भी कुछ हद तक कम हुई है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या इस बार भी लोन और सस्ते होंगे या रेपो रेट पर ब्रेक लगेगा।

शुक्रवार को होगा फैसला, गवर्नर करेंगे घोषणा

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक का नतीजा शुक्रवार, 6 फरवरी को सामने आएगा। इसी दिन गवर्नर मौद्रिक नीति से जुड़े सभी अहम फैसलों की घोषणा करेंगे। मौजूदा हालात में यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसका सीधा असर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई पर पड़ता है।

अब तक 1.25% घट चुका है रेपो रेट

जानकारों के मुताबिक आरबीआई फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट में कुल 1.25 फीसदी की कटौती कर चुका है। मौजूदा समय में न तो महंगाई कोई बड़ी चिंता बनी हुई है और न ही आर्थिक वृद्धि को लेकर कोई तात्कालिक दबाव नजर आ रहा है। इसी वजह से कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार ब्याज दरों को यथावत रखा जा सकता है।

क्या खत्म होने वाला है रेट कट का दौर?

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि एमपीसी के इस बैठक में रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम है। उनके मुताबिक यह बैठक दर-कटौती चक्र के अंत का संकेत भी हो सकती है। आसान शब्दों में कहें तो पिछले साल शुरू हुआ रेपो रेट घटाने का सिलसिला यहीं थम सकता है।

महंगाई कम, फिर भी सतर्क RBI

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार इस समय ब्याज दरों पर विराम लेना ज्यादा उचित होगा। इससे जनवरी 2026 की खुदरा महंगाई दर (CPI) और वित्त वर्ष 2023-24 से लेकर 2025-26 तक के जीडीपी आंकड़ों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

कटौती की गुंजाइश, लेकिन फैसला संभलकर

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी का मानना है कि कम महंगाई आरबीआई को रेपो रेट में कटौती का मौका जरूर देती है। बजट भी राजकोषीय अनुशासन के दायरे में है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका कम है और अर्थव्यवस्था की स्थिति भी संतुलित बनी हुई है। हालांकि, उनका भी कहना है कि इस बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखना ज्यादा संभव है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर विकल्प खुले रखे जा सकें।

 

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