बढ़ती गर्मी के दौर में अचानक कड़ाके की ठंड! ग्लोबल वार्मिंग पर वैज्ञानिकों के बीच तेज़ हुई बहस

नई दिल्ली। दुनिया भर में औसत तापमान के लगातार बढ़ने के बीच कई इलाकों में पड़ रही असामान्य और तीव्र ठंड ने वैज्ञानिक समुदाय को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक ओर ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को लेकर चेतावनियां दी जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर बार-बार सामने आ रहे भीषण ठंड के दौर इस अवधारणा पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं।
पोलर वर्टेक्स की अस्थिरता से बढ़ी ठंड की घटनाएं
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने इस विरोधाभास को अलग-अलग नजरियों से समझाने की कोशिश की है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोध वैज्ञानिक जूडा कोहेन का कहना है कि आर्कटिक क्षेत्र के तेजी से गर्म होने के कारण ऊपरी वायुमंडल में मौजूद पोलर वर्टेक्स कमजोर और अस्थिर हो रहा है। इसका सीधा असर जेट स्ट्रीम पर पड़ता है, जिससे अमेरिका के पूर्वी हिस्सों में लंबे समय तक ठंडी हवाएं, बर्फबारी और बर्फीले तूफान देखने को मिल रहे हैं।
सर्दियों की तीव्रता में बदलाव पर वैज्ञानिकों की राय बंटी
जूडा कोहेन के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में पोलर वर्टेक्स के फैलने और डगमगाने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसने सर्दियों की प्रकृति और उसकी तीव्रता को प्रभावित किया है। हालांकि, सभी वैज्ञानिक इस सिद्धांत से सहमत नहीं हैं और इसे लेकर मतभेद बने हुए हैं।
दीर्घकालिक आंकड़े क्या कहते हैं?
कनाडा के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से जुड़े शोधकर्ता रसेल ब्लैकपोर्ट का कहना है कि लंबे समय के आंकड़े और जलवायु मॉडल साफ तौर पर संकेत देते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण अत्यधिक ठंड की घटनाएं धीरे-धीरे कम हो रही हैं। उनके मुताबिक, कुछ अस्थायी मौसमी घटनाओं के आधार पर समग्र जलवायु रुझानों को नकारा नहीं जा सकता।
एक मौसम से जलवायु का आकलन नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक ठंडे या गर्म मौसम को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना जल्दबाजी होगी। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन के चलते मौसमी पैटर्न में बदलाव आ रहा है और भविष्य में मौसम की चरम स्थितियां अलग-अलग रूपों में सामने आ सकती हैं।

लंबी गर्मी से बदल रहा मौसम का व्यवहार
वुडवेल क्लाइमेट सेंटर की वरिष्ठ वैज्ञानिक जेनिफर फ्रांसिस ने भी इस बात पर जोर दिया कि पूर्वी क्षेत्रों में पड़ी अत्यधिक ठंड को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना सही नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि लंबे समय तक बनी रहने वाली गर्मी मौसमी बदलावों के पैटर्न को प्रभावित कर रही है।
ठंड के एक दौर से नतीजा निकालना गलत
कोलोराडो की रिसर्च वैज्ञानिक एमी बटलर ने कहा कि केवल एक ठंडे दौर के आधार पर जलवायु परिवर्तन का आकलन करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, आंकड़े दिखाते हैं कि लंबे समय तक चलने वाली अत्यधिक ठंड की अवधि लगातार घट रही है और आने वाले वर्षों में इसमें और कमी आने की संभावना है।
