IAS अभिषेक प्रकाश को बड़ी राहत: लखनऊ हाईकोर्ट ने 400 करोड़ रिश्वत केस और चार्जशीट की रद्द
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट रिश्वत मामले में लखनऊ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के केस और दाखिल चार्जशीट को पूरी तरह रद्द कर दिया है। इस फैसले के साथ ही करीब 400 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मांग से जुड़े मामले में सभी आरोपियों को बड़ी राहत मिल गई है।
क्या था 400 करोड़ रिश्वत का आरोप?
पूरा मामला सोलर प्रोजेक्ट के आवंटन और क्रियान्वयन के बदले कथित तौर पर भारी कमीशन मांगे जाने से जुड़ा था। आरोप था कि लगभग 400 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की गई। इस संबंध में 20 मार्च 2025 को एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की जांच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंपी गई, जिसने कार्रवाई करते हुए निकांत जैन को गिरफ्तार किया। निकांत जैन को अभिषेक प्रकाश का करीबी बताया गया था। जांच पूरी होने के बाद STF ने 15 मई 2025 को चार्जशीट दाखिल की थी।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, अपराध नहीं बनता
मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत आरोपों के आधार पर कोई अपराध स्थापित नहीं होता। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कमीशन मांगने के आरोप पर्याप्त साक्ष्यों से समर्थित नहीं हैं और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से अपराध सिद्ध नहीं होता।
शिकायतकर्ता के बयान से बदला केस का रुख
सुनवाई के दौरान मामले में अहम मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता ने कोर्ट में अपनी शिकायत को लेकर गलती स्वीकार की। उसने कहा कि मुख्यमंत्री से की गई शिकायत गलतफहमी के कारण दर्ज हुई थी। हाई कोर्ट ने 15 मई 2025 को दाखिल चार्जशीट को कानूनन त्रुटिपूर्ण मानते हुए निरस्त कर दिया।
बहाली की राह हुई आसान
हाई कोर्ट के फैसले के बाद गिरफ्तार किए गए निकांत जैन को भी बड़ी राहत मिली है। वहीं, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप खत्म हो गए हैं। कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद अब उनकी सेवा में बहाली का रास्ता साफ माना जा रहा है।
