SIR नोटिस पर सियासत तेज: ‘पहले मुसलमान, अब हिंदुओं को परेशान किया जा रहा’, अखिलेश का भाजपा पर ‘वोटबंदी’ का आरोप

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाताओं को भेजे जा रहे नोटिसों को लेकर भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे ‘वोटबंदी अभियान’ करार देते हुए कहा कि यह पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) वर्गों के वोट काटने का ‘बहुत बड़ा षड्यंत्र’ है।
अखिलेश यादव ने कहा कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं को SIR के नोटिस भेजे जा रहे हैं। उनके मुताबिक, नोटबंदी के बाद अब यह भाजपा सरकार का ‘वोटबंदी’ अभियान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत पहले भी खराब थी और अब भी वैसी ही है।
‘पहले मुसलमानों को, अब हिंदुओं को भी कागजों के लिए परेशान किया जा रहा’
सपा प्रमुख ने कहा कि पहले मुसलमानों को कागजात के नाम पर परेशान किया जाता था, लेकिन अब हिंदुओं को भी नोटिस पर नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने इसे व्यापक स्तर पर मतदाताओं को भयभीत करने की कोशिश बताया।
उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग यह दावा कर रहे थे कि गलत वोट पाए जाने पर संबंधित लोगों को निरुद्ध केंद्र भेज दिया जाएगा। अखिलेश ने सवाल उठाया कि क्या अब वोट के आधार पर नागरिकता तय की जाएगी और लोगों को उनके खेत, जमीन और मकान से बेदखल किया जाएगा?
‘जब बड़े नामों पर सवाल, तो आम आदमी कैसे लड़ेगा?’

अखिलेश यादव ने कहा कि जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के परिजनों तक को नकारे जाने की बात सामने आती है, तो आम लोग कैसे अपनी बात रख पाएंगे? उन्होंने आशंका जताई कि मतदाता पहचान पत्र को लेकर अनिश्चितता की स्थिति में आम नागरिक अपने अधिकार, विरासत और संपत्ति को लेकर हमेशा तनाव में रहेंगे।
भाजपा पर ‘बेईमानी’ का आरोप
सपा प्रमुख ने भाजपा को ‘बेईमान पार्टी’ बताते हुए कहा कि पार्टी ने अपनी बेईमानी, धोखाधड़ी और चाल-चरित्र के पतन के कारण जनाधार खो दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब भाजपा को सिर्फ धांधली का सहारा बचा है।
अखिलेश ने यह भी सवाल उठाया कि जिन कागजों के आधार पर चुनाव आयोग अब मतदाताओं के नाम, उम्र और अन्य विवरण सही करने का दावा कर रहा है, वही दस्तावेज पहले भी जमा किए गए थे। अगर तब गलती हुई, तो जिम्मेदारी किसकी है? उन्होंने कहा कि गलती अगर चुनाव आयोग की है, तो उसे सुधारने के लिए जनता को अपना काम छोड़कर क्यों दौड़ना पड़ रहा है?
