सर्वाइकल कैंसर का बढ़ता खतरा: पुरुषों की कुछ लापरवाह आदतें भी बन सकती हैं बड़ी वजह, जानें कितना खतरनाक है यह कैंसर

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आज के समय में कैंसर दुनिया भर में तेजी से फैलने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल हो चुका है। भारत में महिलाओं के बीच जिस कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, उनमें सर्वाइकल कैंसर प्रमुख है। यह कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन पुरुषों की कुछ असावधान आदतें भी महिलाओं में इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिससे कई बार महिलाएं समय रहते इसे पहचान नहीं पातीं।

एचपीवी वायरस है मुख्य कारण

सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी एचपीवी माना जाता है। यह वायरस आमतौर पर शारीरिक संबंधों के माध्यम से फैलता है। यदि किसी व्यक्ति को यह संक्रमण है और वह बिना सुरक्षा के संबंध बनाता है, तो यह वायरस आसानी से महिला पार्टनर तक पहुंच सकता है। लंबे समय तक यह संक्रमण शरीर में रहने पर सर्विक्स की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है, जिससे आगे चलकर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

पीरियड्स के दौरान संबंध बनाना बढ़ा सकता है जोखिम

विशेषज्ञों के अनुसार मासिक धर्म के दौरान शारीरिक संबंध बनाना चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित नहीं माना जाता। इस समय सर्विक्स सामान्य दिनों की तुलना में अधिक संवेदनशील और नाजुक होता है। ऐसे में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। हालांकि यह आदत सीधे तौर पर कैंसर का कारण नहीं बनती, लेकिन संक्रमण और असामान्य ब्लीडिंग की संभावना बढ़ा सकती है, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकती है।

बिना सुरक्षा के संबंध भी बड़ी वजह

सुरक्षा के बिना शारीरिक संबंध बनाना भी सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है। कंडोम का इस्तेमाल न करने पर एचपीवी वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकता है। यदि किसी व्यक्ति के एक से अधिक यौन साथी हों, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

धूम्रपान की आदत भी खतरनाक

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक धूम्रपान भी अप्रत्यक्ष रूप से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। यदि पुरुष नियमित रूप से धूम्रपान करते हैं और घर के भीतर या अपने साथी के सामने धूम्रपान करते हैं, तो उससे निकलने वाला धुआं महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डालता है। इससे न केवल फेफड़ों और हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है, बल्कि लंबे समय में यह सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

समय पर जांच और जागरूकता है सबसे बड़ा बचाव

डॉक्टरों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, सुरक्षित संबंध, स्वच्छता और जागरूकता बेहद जरूरी है। शुरुआती चरण में इस बीमारी की पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है। इसलिए महिलाओं को किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय-समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

 

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