गैस संकट से निपटने के लिए सरकार का बड़ा कदम, ESMA लागू कर प्राथमिक सेक्टर्स को दी फ्यूल सप्लाई में प्राथमिकता

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नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ने के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ईरान युद्ध के बाद पैदा हुए संभावित गैस संकट को देखते हुए सरकार ने आपातकालीन प्रावधानों के तहत आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने वाला कानून लागू कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में घरेलू और जरूरी क्षेत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बिना बाधा जारी रहे और आम लोगों पर संकट का असर कम से कम पड़े।

सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में बांटने का आदेश भी जारी किया है, ताकि जरूरत के अनुसार गैस का वितरण किया जा सके। केंद्र ने वर्ष 2026 में प्राकृतिक गैस सप्लाई रेगुलेशन से संबंधित आदेश जारी किया है, जो आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद प्रभावी होगा।

क्या है ESMA और क्यों किया गया लागू

ESMA यानी आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम एक ऐसा कानून है जिसे भारत की संसद ने वर्ष 1968 में लागू किया था। इसका उद्देश्य उन सेवाओं को बिना बाधा जारी रखना है जिनका सीधा संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से होता है।

इस कानून के लागू होने के बाद आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते और काम बंद नहीं कर सकते। यदि ऐसा होता है तो सरकार उन्हें तुरंत काम पर लौटने का निर्देश दे सकती है। इसके अलावा कर्मचारी बंद या कर्फ्यू जैसे हालात का हवाला देकर भी काम पर आने से इनकार नहीं कर सकते। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जरूरी सेवाओं की आपूर्ति लगातार बनी रहे।

प्राकृतिक गैस सप्लाई को चार प्राथमिक सेक्टर में बांटा गया

सरकार ने गैस वितरण को चार अलग-अलग प्राथमिक सेक्टरों में बांटते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन सेक्टरों को उनकी आवश्यकता और पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

प्राथमिक सेक्टर-1 को मिलेगी पूरी आपूर्ति

पहले प्राथमिक सेक्टर में घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस की आपूर्ति, परिवहन के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस, एलपीजी उत्पादन और उसकी आवश्यकताएं तथा पाइपलाइन संचालन से जुड़ा ईंधन शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जब तक संचालन के लिए पर्याप्त गैस उपलब्ध रहती है।

प्राथमिक सेक्टर-2 में उर्वरक उद्योग शामिल

दूसरे सेक्टर में उर्वरक संयंत्रों को शामिल किया गया है। इन प्लांट्स को उनकी पिछले छह महीनों की औसत खपत के लगभग 70 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी। यह गैस केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही इस्तेमाल की जा सकेगी और इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकरण को देनी होगी। किसी संयंत्र को आवंटित गैस को दूसरी इकाई में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं होगी।

प्राथमिक सेक्टर-3 में उद्योगों को सीमित गैस आपूर्ति

तीसरे प्राथमिक सेक्टर में राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। इन उपभोक्ताओं को पिछले छह महीनों की औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जब तक संचालन संभव रहेगा। इस सेक्टर में गैस आवंटन के नियम पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ तथा उद्योग समिति के समन्वय से तय किए जाएंगे।

प्राथमिक सेक्टर-4 में व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ता

चौथे सेक्टर में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए जुड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है। इन्हें भी पिछले छह महीनों की औसत खपत के करीब 80 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए नियम तय करने में संबंधित संस्थाएं और उद्योग समिति मिलकर काम करेंगी।

कुछ सेक्टरों में गैस आपूर्ति घटाई जा सकती है

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्राथमिक क्षेत्रों की जरूरत पूरी करने के लिए कुछ सेक्टरों में गैस की आपूर्ति आंशिक या पूरी तरह घटाई जा सकती है। इसमें पेट्रोकेमिकल इकाइयों और जरूरत के अनुसार बिजली संयंत्रों को शामिल किया जा सकता है। वहीं तेल शोधन कंपनियों को उनके पिछले छह महीनों की खपत के लगभग 65 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि संचालन प्रभावित न हो।

 

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