यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: ‘खतौनी’ मिलान के बाद ही होगी प्रॉपर्टी रजिस्ट्री, ओला-उबर के लिए अनिवार्य पंजीकरण

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उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में मंगलवार को कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री, परिवहन व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की पारदर्शिता पर पड़ेगा। राज्य सरकार ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्री प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाते हुए धोखाधड़ी रोकने के लिए नए नियम लागू करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही कैब एग्रीगेटर कंपनियों के संचालन और ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को लेकर भी बड़े फैसले किए गए हैं।

‘खतौनी’ मिलान के बाद ही जारी होगा स्टाम्प पेपर

स्टांप एवं पंजीयन विभाग के मंत्री ने जानकारी दी कि अब प्रदेश में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री से पहले विक्रेता की वास्तविक मालिकाना हक की पुष्टि अनिवार्य होगी। इसके तहत रजिस्ट्री से पहले विक्रेता के नाम का मिलान राजस्व अभिलेख यानी ‘खतौनी’ से किया जाएगा। जब तक यह सत्यापन नहीं होगा, तब तक स्टाम्प पेपर जारी नहीं किया जाएगा।

अब तक कई मामलों में केवल आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र के आधार पर स्टाम्प पेपर जारी हो जाता था, जिससे फर्जी तरीके से किसी और की जमीन बेचने जैसी घटनाएं सामने आती थीं। सरकार का कहना है कि नए नियम के लागू होने से जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

ओला-उबर के लिए नया नियम, बिना पंजीकरण नहीं चलेगी सेवा

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश की 59,163 ग्राम सभाओं को सीधे बस सेवा से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव में दिन में कम से कम दो बार बस सेवा उपलब्ध हो, जिससे ग्रामीणों के लिए आवागमन आसान हो सके।

इसके साथ ही ओला और उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के लिए भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब इन कंपनियों को उत्तर प्रदेश में संचालन के लिए राज्य में अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। बिना राज्य पंजीकरण के ये कैब सेवाएं प्रदेश की सीमाओं में संचालित नहीं की जा सकेंगी।

सरकारी कर्मचारियों के निवेश पर पारदर्शिता का नियम

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नए प्रावधान लागू किए जा रहे हैं। इसके तहत सभी सरकारी कर्मचारियों को हर वर्ष अपनी अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा यदि कोई कर्मचारी अपने छह महीने के मूल वेतन से अधिक की राशि शेयर बाजार या किसी अन्य निवेश माध्यम में लगाता है, तो उसे इसकी जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करना है।

कांशीराम आवास योजना की इमारतों की होगी रंगाई-पुताई

आवास से जुड़े फैसलों में कांशीराम आवास योजना की इमारतों की मरम्मत और रंगाई-पुताई कराने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये आवास दलित वर्ग के लिए सुरक्षित रहेंगे और जिन लोगों ने अवैध रूप से इन आवासों पर कब्जा किया हुआ है, उन्हें वहां से हटाया जाएगा।

इसके अलावा अयोध्या में स्पोर्ट्स कॉलेज के निर्माण के लिए 2500 वर्ग मीटर जमीन उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया है, जिससे खेल प्रतिभाओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

 

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