तमिलनाडु में राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला, बोले—‘दक्षिण भारत को कमजोर करने की साजिश’, महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन पर उठाए सवाल

रानीपेट (तमिलनाडु): तमिलनाडु में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रानीपेट समेत कई इलाकों में जनसभाओं को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन (डीलिमिटेशन) के मुद्दे पर सरकार की नीतियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
दक्षिणी राज्यों को कमजोर करने का आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के नाम पर देश को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जिस तरीके से संसद में इस विधेयक को आगे बढ़ा रहे थे, उसके पीछे एक “खतरनाक मंशा” छिपी हुई थी। उनके अनुसार, इस प्रस्ताव के जरिए चुनावी नक्शे में बदलाव की कोशिश की जा रही थी, जिससे दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों की राजनीतिक ताकत को कमजोर किया जा सके।
‘दक्षिण भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश’
रानीपेट में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में सरकार देश के दक्षिणी हिस्सों को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन के जरिए राज्यों की सीटों के पुनर्निर्धारण की योजना बनाई जा रही है, जिससे कुछ राज्यों का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है।
प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप
थुरैयूर में एक अन्य जनसभा के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री संसद में विपक्ष की आंखों में आंखें डालकर बात नहीं कर पाते, क्योंकि वे “पूरी तरह से समझौता किए हुए नेता” हैं। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पर बाहरी प्रभाव है और वे कुछ अंतरराष्ट्रीय नेताओं के इशारों पर काम करते हैं।

महिला आरक्षण विधेयक पर विवाद
गौरतलब है कि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक हाल ही में लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था। मतदान में 298 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 230 ने विरोध में वोट दिया। यह विधेयक पारित नहीं हो सका, जिसके बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
दक्षिणी राज्यों का विरोध पहले से जारी
परिसीमन के मुद्दे को लेकर दक्षिण भारत के कई राज्य पहले से ही विरोध जता रहे हैं। तमिलनाडु सरकार समेत कई क्षेत्रीय दलों का कहना है कि जनसंख्या आधारित पुनर्सीमांकन से उनके संसदीय प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
