पेट्रोल-डीजल पर बड़ा बदलाव! CAFE-3 नियम से ऑटो सेक्टर में क्रांतिकारी परिवर्तन, नई कार खरीदने वालों को जानना जरूरी

नई दिल्ली: भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बड़ा और अहम बदलाव होने जा रहा है, जो सीधे तौर पर कार कंपनियों से लेकर आम उपभोक्ताओं तक को प्रभावित करेगा। सरकार और ऑटो इंडस्ट्री के बीच CAFE-3 (Corporate Average Fuel Efficiency) नियमों पर सहमति बन चुकी है, जो अप्रैल 2027 से लागू होंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और फ्यूल एफिशिएंसी को बढ़ाना है।
क्या है CAFE-3 नियम
CAFE यानी कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी एक ऐसा सिस्टम है, जिसके तहत किसी कंपनी की सभी गाड़ियों का औसत माइलेज और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन तय सीमा के अंदर रखना अनिवार्य होगा। इसका मतलब यह है कि अब नियम किसी एक गाड़ी पर नहीं, बल्कि पूरी कंपनी के बेड़े के औसत उत्सर्जन पर आधारित होंगे।
डिजाइन और तकनीक में बड़ा बदलाव
पहले जहां नियम वाहन के आकार और श्रेणी के आधार पर तय होते थे, अब पूरा फोकस कंपनियों के कुल उत्सर्जन पर रहेगा। इससे ऑटो कंपनियों को अपनी पूरी प्रोडक्ट लाइन को संतुलित करना होगा। हल्के मटेरियल, बेहतर एयरोडायनामिक डिजाइन और ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट तकनीक पर काम तेजी से बढ़ेगा।
फ्यूल और इंजन टेक्नोलॉजी में बदलाव
सरकार ने E25 फ्यूल की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिसमें पेट्रोल में 25 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाएगा। इसके साथ ही फ्लेक्स-फ्यूल इंजन को बढ़ावा मिलेगा, जो पेट्रोल और एथेनॉल दोनों पर चलने में सक्षम होंगे। आने वाले समय में एथेनॉल ब्लेंडिंग को और बढ़ाने की भी संभावना है, जिससे पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों को बढ़ावा
नए नियमों के तहत इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार ‘सुपर क्रेडिट’ सिस्टम पर भी काम कर रही है, जिसके तहत ज्यादा EV और हाइब्रिड बेचने वाली कंपनियों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इससे ऑटो इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा मिलेगा।

कंपनियों के लिए कड़े लक्ष्य
CAFE-3 के अनुसार, कंपनियों को अपने वाहनों के औसत CO2 उत्सर्जन को वित्त वर्ष 2027 में 113 ग्राम प्रति किलोमीटर से घटाकर 2032 तक 78.9 ग्राम प्रति किलोमीटर तक लाना होगा। हालांकि सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देना है।
कीमतों पर असर और उपभोक्ताओं की स्थिति
शुरुआती दौर में नई तकनीक और अनुसंधान की लागत के चलते वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। लेकिन लंबे समय में बेहतर माइलेज और कम ईंधन खर्च के कारण उपभोक्ताओं, खासकर मिडिल क्लास को राहत मिलने की उम्मीद है।
ऑटो सेक्टर में नए युग की शुरुआत
CAFE-3 नियमों के लागू होने के बाद भारत का ऑटो सेक्टर एक नए दौर में प्रवेश करेगा। इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां तेजी से बाजार में दिखाई देंगी। इसका सीधा असर प्रदूषण कम करने और ईंधन पर निर्भरता घटाने में देखने को मिलेगा।
