पेट की गैस और एसिडिटी को न समझें मामूली, बन सकता है ‘साइलेंट किलर’ फैटी लिवर, समय रहते न संभले तो हो सकता है लिवर फेलियर

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नई स्वास्थ्य चेतावनी में विशेषज्ञों ने पेट से जुड़ी सामान्य लगने वाली समस्याओं को लेकर गंभीर सतर्कता बरतने की सलाह दी है। गैस, एसिडिटी और पेट में भारीपन जैसी दिक्कतों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह शरीर में विकसित हो रहे गंभीर रोग ‘फैटी लिवर’ के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

फैटी लिवर बन सकता है जानलेवा बीमारी
आईजीआईएमएस के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार झा के अनुसार फैटी लिवर एक ऐसी बीमारी है, जो शुरुआती चरण में लगभग बिना लक्षणों के होती है। यह धीरे-धीरे लिवर में वसा जमा कर उसे कमजोर कर देती है और समय पर इलाज न होने पर स्थिति लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर तक पहुंच सकती है।

पेट का बढ़ा हुआ घेरा बड़ा संकेत
डॉक्टरों के मुताबिक, यदि शरीर दुबला है लेकिन पेट बाहर निकला हुआ है, तो यह फैटी लिवर का संकेत हो सकता है। पुरुषों में यदि पेट का घेरा 90 सेंटीमीटर से अधिक और महिलाओं में 80 सेंटीमीटर से ज्यादा हो, तो लिवर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति शरीर के मेटाबॉलिज्म और लिवर हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है।

लिवर में सूजन से बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार जब लिवर में फैट बढ़ता है तो उसमें सूजन आ जाती है और एसजीपीटी (SGPT) लेवल बढ़ने लगता है। इसके बाद धीरे-धीरे लिवर में घाव बनने शुरू हो जाते हैं, जिसे फाइब्रोसिस कहा जाता है। अगर इस अवस्था में भी इलाज न हो, तो लिवर पूरी तरह खराब होकर लिवर फेलियर या कैंसर का रूप ले सकता है।

गंभीर स्थिति में दिखते हैं ये लक्षण
डॉक्टरों का कहना है कि अगर बीमारी आगे बढ़ जाए तो पेट में पानी भरना, कमजोरी बढ़ना और मुंह से खून आना जैसे गंभीर लक्षण सामने आते हैं। यह स्थिति बेहद खतरनाक मानी जाती है और तत्काल इलाज की जरूरत होती है।

लाइफस्टाइल में बदलाव है सबसे जरूरी उपाय
विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि फैटी लिवर से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव बेहद जरूरी है। जंक फूड, अधिक चीनी, कोल्ड ड्रिंक और रेड मीट से दूरी बनानी चाहिए। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

समय पर जांच से बच सकती है जान
अगर बार-बार गैस, पेट फूलना या अपच जैसी समस्या बनी रहती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और अल्ट्रासाउंड करवाना जरूरी है ताकि बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सके।

 

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