अन्ना हजारे का बड़ा बयान: AAP के 7 सांसदों के अलग होने पर बोले—‘अगर सही रास्ते पर चलते तो ऐसा नहीं होता’, पार्टी में मचा सियासी भूचाल

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आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के एक साथ पार्टी से अलग होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ पार्टी नेतृत्व को झटका दिया है, बल्कि संगठन के भीतर की अंदरूनी खींचतान को भी सामने ला दिया है। इस पूरे मामले पर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की भी प्रतिक्रिया सामने आई है, जिनके आंदोलन से ही आम आदमी पार्टी की नींव पड़ी थी।

‘सही रास्ते पर चलते तो नहीं होता बिखराव’—अन्ना हजारे

अन्ना हजारे ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने और निर्णय लेने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा और अन्य सांसदों ने यदि पार्टी छोड़ी है तो इसके पीछे कोई न कोई असहमति या परेशानी जरूर रही होगी।

अन्ना हजारे ने साफ तौर पर कहा कि यह स्थिति आम आदमी पार्टी के नेतृत्व में कमी को दर्शाती है। उनके अनुसार, अगर पार्टी सही दिशा और मूल सिद्धांतों पर चलती तो यह स्थिति नहीं बनती और ये नेता संगठन के साथ बने रहते।

AAP में हलचल तेज, अंदरूनी मतभेद सामने आए

सांसदों के इस्तीफे के बाद आम आदमी पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती ने संदीप पाठक से सवाल करते हुए सोशल मीडिया पर पूछा कि आखिर यह फैसला क्यों लिया गया, जबकि पार्टी का रुख पहले भाजपा के खिलाफ सख्त रहा है।

वहीं, मनीष सिसोदिया ने देर रात अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की और मौजूदा हालात पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि बैठक में आगे की रणनीति और इस राजनीतिक फूट के संभावित असर पर मंथन किया गया।

दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी अब इस मामले में राज्यसभा के चेयरमैन से दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग करने की तैयारी में है। पार्टी का तर्क है कि केवल कुछ ही सांसदों ने पार्टी छोड़ी है और वे बहुमत में नहीं हैं, इसलिए उनकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए।

बताया जा रहा है कि राज्यसभा में पार्टी के मुख्य व्हिप एनडी गुप्ता की ओर से चेयरमैन को पत्र भेजा जाएगा, जिसमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

AAP में संकट की स्थिति, आगे की रणनीति पर नजर

इस पूरे घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी के भीतर नेतृत्व और एकजुटता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी इस राजनीतिक संकट से कैसे उबरती है और आने वाले दिनों में क्या कदम उठाती है।

 

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