फर्जी आधार-पैन कार्ड मामले पर सख्त हुआ हाई कोर्ट, आरोपी की याचिका खारिज; कहा- ‘क्या आप भारतीय नहीं हैं?’
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और किरायानामा तैयार करने के आरोपी एक व्यक्ति को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए आरोपी की याचिका खारिज कर दी और कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां राष्ट्रहित के खिलाफ हैं।
मामला पश्चिम बंगाल निवासी 27 वर्षीय अर्नब मंडल से जुड़ा है, जिसके खिलाफ बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने के आरोप हैं। आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने जताई नाराजगी
याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को बेहद गंभीर बताया। अदालत ने कहा कि फर्जी पहचान पत्र तैयार कर गैर-नागरिकों को उपलब्ध कराना देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए चिंता का विषय है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे लोग ही दूसरे देशों से आने वालों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराकर व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि यह राष्ट्रहित के विरुद्ध कार्य है।
याचिकाकर्ता की ओर से क्या दलील दी गई?
आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि जालसाजी से जुड़ी कुछ धाराएं उनके मुवक्किल पर लागू नहीं होती हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी स्वयं विदेशी नागरिक नहीं है, इसलिए विदेशी अधिनियम की संबंधित धाराओं का उपयोग उसके खिलाफ नहीं किया जा सकता।
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी जनवरी 2024 से हिरासत में है और संभावित अधिकतम सजा की अवधि का एक बड़ा हिस्सा जेल में बिता चुका है। इसी आधार पर मामले में राहत की मांग की गई।
‘देश के लिए थोड़ी चिंता तो कीजिए’
दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि गैर-नागरिकों को अवैध रूप से पहचान दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते रहे, तो इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे दस्तावेज आगे चलकर कई अन्य अधिकारों और सुविधाओं का आधार बन जाते हैं, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है।
गैर-नागरिकों के पास आधार कार्ड होने पर भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस बात पर भी चिंता जताई कि गैर-नागरिकों के पास आधार कार्ड कैसे पहुंच रहे हैं। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों के कारण व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं और सरकार के लिए निगरानी करना चुनौतीपूर्ण बन जाता है।
कोर्ट ने आरोपी के रवैये पर भी नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्या देश के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है और क्या ऐसे मामलों को सामान्य अपराध की तरह देखा जा सकता है।
राहत देने से इनकार, जमानत याचिका दायर करने की सलाह
अदालत ने मामले की कार्यवाही रद्द करने और अंतरिम सुरक्षा देने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
साथ ही अदालत ने कहा कि यदि आरोपी किसी अन्य कानूनी राहत की मांग करना चाहता है तो वह संबंधित प्रक्रिया अपना सकता है, लेकिन मामले को रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने आरोपी को जमानत के लिए उचित अदालत का रुख करने की सलाह दी।
इसके बाद आरोपी पक्ष ने निचली अदालत में जमानत के लिए आवेदन करने की अनुमति मांगी और याचिका वापस लेने का अनुरोध किया।
