रेलवे इतिहास में नई उड़ान: दुनिया की पहली हाइड्रोजन नैरो-गेज ट्रेन लॉन्च, धुआं नहीं सिर्फ पानी की भाप निकलेगी

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रोम: रेल परिवहन को पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। स्टैडलर और एआरएसटी ने दुनिया की पहली नैरो-गेज हाइड्रोजन ट्रेन पेश कर दी है। यह अत्याधुनिक ट्रेन वर्ष 2028 से इटली के सार्डिनिया क्षेत्र में यात्रियों के लिए सेवा शुरू करेगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह डीजल के बजाय हाइड्रोजन ईंधन से संचालित होगी और संचालन के दौरान धुएं की जगह केवल पानी की भाप उत्सर्जित करेगी।

पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई ट्रेन

सार्डिनिया का भौगोलिक क्षेत्र पहाड़ी और घुमावदार होने के कारण वहां ओवरहेड विद्युत लाइन बिछाना आसान नहीं है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन को विशेष रूप से नैरो-गेज रेलवे नेटवर्क के लिए विकसित किया गया है। यह ट्रेन अल्घेरो एयरपोर्ट से मामुंटानास, ससारी से अल्घेरो और ससारी से सोर्सो मार्ग पर संचालित की जाएगी। कंपनी का दावा है कि नैरो-गेज रेलवे के लिए हाइड्रोजन ट्रेन विकसित करने वाली वह दुनिया की एकमात्र कंपनी है।

हर साल 2,100 टन से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन में होगी कमी

सार्डिनिया में कुल 10 नई हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएंगी। कंपनी के अनुसार, इनके संचालन से हर वर्ष 2,100 टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे रेल परिवहन को अधिक स्वच्छ और टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

सौर ऊर्जा से तैयार होगा हाइड्रोजन ईंधन

इस ट्रेन में फ्यूल सेल आधारित प्रणोदन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। बीच वाले डिब्बे में लगाए गए हाइड्रोजन टैंक और फ्यूल सेल हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित करते हैं, जिससे ट्रैक्शन बैटरी चार्ज होती है और ट्रेन बिना विद्युत लाइन वाले मार्गों पर भी आसानी से संचालित हो सकती है। खास बात यह है कि इस ट्रेन में उपयोग होने वाला हाइड्रोजन 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा से तैयार किया जाएगा। इससे ऊर्जा उत्पादन से लेकर ट्रेन के संचालन तक पूरी व्यवस्था शून्य उत्सर्जन आधारित होगी।

यात्रियों को मिलेगा आधुनिक और शांत सफर

नई हाइड्रोजन ट्रेन को हल्के वजन वाले विशेष मैटेरियल से तैयार किया गया है ताकि यह नैरो-गेज ट्रैक पर बेहतर प्रदर्शन कर सके। इसमें बड़ी पैनोरमिक खिड़कियां, वातानुकूलित कोच, लो-फ्लोर डिजाइन और कम शोर वाली आधुनिक तकनीक दी गई है। डीजल ट्रेनों की तुलना में यह ट्रेन कम कंपन और कम ध्वनि के साथ अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह तकनीक दुनिया के कई देशों के लिए हरित रेलवे मॉडल बन सकती है।

 

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