संसद में आज सियासी संग्राम तेज होने के आसार! FCRA विधेयक पर बोल सकते हैं अमित शाह, परिसीमन विवाद भी रहेगा केंद्र में

jagran-photo-1785977822962_v

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में गुरुवार का दिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर सदन में महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर सदन में अपना पक्ष रख सकते हैं। इसके साथ ही परिसीमन और अन्य मुद्दों पर जारी राजनीतिक टकराव के बीच उनकी संभावित टिप्पणी पर भी सभी की नजर रहेगी।

एफसीआरए संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी

सरकार मानसून सत्र के दौरान ही एफसीआरए संशोधन विधेयक को सदन में पेश कर चर्चा के बाद पारित कराने की तैयारी में है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और सख्त बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना बताया जा रहा है। विधेयक में गैर-सरकारी संगठनों और संस्थाओं के लिए पंजीकरण, ऑडिट, रिपोर्टिंग और संपत्ति संबंधी प्रावधानों को लेकर नए प्रावधान शामिल किए गए हैं।

अमित शाह के बयान पर टिकी राजनीतिक नजर

सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा संसदीय गतिरोध के बीच एफसीआरए विधेयक पर अमित शाह का संभावित संबोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वह इस दौरान विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे विभिन्न आरोपों पर भी सरकार का पक्ष रख सकते हैं।

विपक्ष लगातार उठा रहा है कई मुद्दे

मानसून सत्र के दौरान विपक्ष गृह मंत्री की अनुपस्थिति को लेकर लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। इसके अलावा जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर भी विपक्ष गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग कर रहा है। इन मुद्दों को लेकर दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई है।

गतिरोध खत्म करने की कोशिश में सरकार

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर एफसीआरए संशोधन विधेयक पर अमित शाह के सदन में बोलने का प्रस्ताव रखा है। इसे संसद में पिछले कई दिनों से जारी गतिरोध समाप्त करने की दिशा में सरकार की अहम पहल माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में भी चल रही है मामले की सुनवाई

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प से जुड़े मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है। अदालत ने संकेत दिया है कि हिंसा में शामिल लोगों और प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की कथित ज्यादती के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Samayik Sahara के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...

एक नज़र