पुतिन से डील के बाद ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, रूसी तेल-गैस पर प्रतिबंध और टैरिफ से दी छूट; भारत को बड़ी राहत

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वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून के तहत प्रस्तावित पाबंदियों, प्रतिबंधों और शुल्कों से छूट देने का आदेश जारी किया है। रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों के लिए ट्रंप का यह फैसला अहम माना जा रहा है। इससे भारत और चीन को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, रूस पर सख्त कार्रवाई की दिशा में उठाए गए कदमों के बीच ट्रंप के इस फैसले को उनके रुख में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

ट्रंप ने प्रतिबंधों से छूट देने का आदेश क्यों जारी किया?

ट्रंप ने शुक्रवार शाम जारी कार्यकारी आदेश में कहा कि वह ग्राहम कानून के तहत आने वाले प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट दे रहे हैं। उन्होंने इस फैसले को अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया। इस संबंध में उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को प्रमाणपत्र भी सौंपा है।

ये प्रतिबंध और शुल्क उस विधेयक के तहत लागू होने थे, जिस पर ट्रंप ने पिछले महीने हस्ताक्षर किए थे। इनके प्रभावी होने की निर्धारित तारीख से ठीक एक दिन पहले उन्होंने छूट देने का फैसला किया।

पुतिन के साथ समझौते के बाद बदला ट्रंप का रुख

ट्रंप का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब वह रूस के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं। वह सार्वजनिक रूप से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की आलोचना कर चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने यूक्रेन में नया नेतृत्व चुने जाने का सुझाव भी दिया था।

पिछले सप्ताह ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक समझौते की घोषणा की थी। इसके तहत रूस अमेरिका को डीजल की आपूर्ति करेगा। समझौते के अनुसार, रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल भेजेगा। इसके बाद आने वाले महीनों में डीजल की अतिरिक्त खेप भी भेजी जानी है।

इस समझौते पर जेलेंस्की ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने इसे अमेरिका और रूस के साझेदारों के लिए अनुचित और कमजोर फैसला बताया था। जेलेंस्की ने आरोप लगाया था कि मॉस्को इस समझौते के लिए अपना आभार यूक्रेन पर हमले करके जता रहा है।

भारत पर कितना पड़ सकता था टैरिफ का असर?

अगर ट्रंप भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाते, तो यह भारतीय सामानों पर अमेरिका की ओर से पहले से लगाए गए 10 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त होता। अमेरिका ने यह 10 प्रतिशत शुल्क जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने के आरोप के आधार पर लगाया था।

हालांकि, प्रस्तावित नए शुल्कों का भारतीय निर्यात पर वास्तविक असर कितना होता, इसका आकलन आधिकारिक दरों की घोषणा के बाद ही किया जा सकता था। अब ट्रंप की ओर से छूट दिए जाने के फैसले से भारत को संभावित अतिरिक्त शुल्कों से राहत मिलने की उम्मीद है।

रूसी तेल खरीद पर पहले भी भारत-अमेरिका में बढ़ा था तनाव

रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर पिछले साल भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ गया था। उस समय ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। यह शुल्क पहले से लागू 25 प्रतिशत जवाबी टैरिफ के अतिरिक्त था।

हालांकि, फरवरी 2026 में अतिरिक्त टैरिफ हटा लिया गया था। इसके बाद भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे के तहत जवाबी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था।

भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों पर क्या कहा था?

पिछले महीने अमेरिकी कांग्रेस में रूस पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित विधेयक पारित होने के बाद भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया था। भारत ने कहा था कि वह अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि भारत अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके लिए देश ऊर्जा आपूर्ति के विविध स्रोतों पर निर्भर रहेगा और बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेगा।

क्या है ग्राहम कानून और इसमें क्या प्रावधान थे?

‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम का यह कानून अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर बनाया गया था। ग्राहम अमेरिकी संसद में यूक्रेन के प्रमुख समर्थकों में शामिल थे। इस साल जुलाई में कीव की यात्रा से लौटने के कुछ समय बाद उनका निधन हो गया था।

इस कानून के तहत ट्रंप को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों—चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान—से आने वाले सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था।

इसके अलावा, कानून में रूस की कई संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने और अमेरिका में आयात होने वाले सभी रूसी ऊर्जा उत्पादों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान भी शामिल था। इन कदमों को लागू करने की एक महीने की समयसीमा 18 अक्टूबर को समाप्त होने वाली थी। इससे ठीक पहले ट्रंप ने छूट देने का आदेश जारी कर दिया।

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