UGC नियमों पर घिरी BJP ने उठाया बड़ा कदम, समीक्षा के लिए बनेगी कमेटी; चुनाव से पहले सवर्ण और OBC वोट बैंक के बीच फंसी पार्टी
केशव मौर्य के कार्यक्रम में UGC पर नारेबाजी से बढ़ी BJP की मुश्किल
UGC विवाद का असर उत्तर प्रदेश में BJP के कार्यक्रमों में भी दिखाई देने लगा है। 2 नवंबर को प्रयागराज के परेड ग्राउंड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भाषण दे रहे थे। इसी बीच कुछ युवाओं ने UGC के नए नियमों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और उनसे इस मुद्दे पर जवाब मांगा। केशव मौर्य ने कहा कि वह हर मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार हैं और किसी विषय पर बोलने से पीछे नहीं हटते। हालांकि, कार्यक्रम में हंगामे की स्थिति बनने पर पुलिस सक्रिय हुई और नारेबाजी कर रहे रोहित तिवारी को अपने साथ ले गई। आरोप है कि इस दौरान उनके साथ मारपीट भी की गई।
इस घटना के बाद UGC नियमों को लेकर सवर्ण समाज की नाराजगी एक बार फिर चर्चा में आ गई। BJP को चिंता है कि कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे के वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने से पार्टी के पारंपरिक समर्थकों के बीच नाराजगी और बढ़ सकती है। खासकर युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के बीच इस मुद्दे का असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने बताया, नियमों की समीक्षा के लिए बनेगी कमेटी
UGC के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने समीक्षा कमेटी बनाने की तैयारी की जानकारी दी। सरकार की ओर से कहा गया कि नियमों पर पुनर्विचार किया जाएगा और इनके क्रियान्वयन में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे किसी भी विद्यार्थी को लेकर आशंका न रहे। अदालत ने भी सभी छात्रों के हितों की सुरक्षा को जरूरी बताया।
याचिकाकर्ता की ओर से केंद्र की इस पहल का स्वागत किया गया, लेकिन साथ ही सवाल भी उठाया गया कि जब नियमों को लेकर इतनी गंभीर आशंकाएं थीं तो इन्हें लागू करने की जरूरत ही क्यों पड़ी। दरअसल, UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए नियम बनाए थे। लेकिन नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को शामिल किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। अब विरोध को देखते हुए सरकार की ओर से समीक्षा के संकेत दिए गए हैं।
UGC विवाद पर संघ की नजर, BJP को लगातार मिल रहा नाराजगी का फीडबैक
UGC के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज की नाराजगी की जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तक भी पहुंच चुकी है। बताया जा रहा है कि संघ को लगातार ऐसे फीडबैक मिल रहे थे कि यह मुद्दा BJP के पारंपरिक समर्थकों के बीच गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है और इसका असर उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में पड़ सकता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई थी। उनके मुताबिक, UGC नियमों को लेकर BJP के कोर वोटर में नाराजगी है और इस संबंध में लगातार प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।
प्रयागराज में केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे ने पार्टी की चिंता और बढ़ा दी। BJP को आशंका है कि यदि इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आती रहीं तो उसे राजनीतिक स्तर पर जवाब देना मुश्किल हो सकता है। इसी बीच पार्टी ने उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले अपने विभिन्न प्रकोष्ठों को विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और जनता के बीच संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी दी है। UGC विवाद पर भी इन संगठनों के माध्यम से लोगों को समझाने की कोशिश की जा रही है।
BJP के सामने दोहरी चुनौती, सवर्ण नाराज हुए तो नुकसान और OBC छिटके तो भी मुश्किल
UGC का मुद्दा BJP के लिए राजनीतिक रूप से बेहद पेचीदा बन गया है। नए नियमों को वापस लेने या उनमें बड़ा बदलाव करने की स्थिति में OBC वर्ग की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, नियमों का समर्थन जारी रखने पर सवर्ण समाज के मतदाताओं की नाराजगी बढ़ने का खतरा है।
उत्तर प्रदेश में सवर्ण समाज को BJP का महत्वपूर्ण समर्थक वर्ग माना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में सवर्ण आबादी करीब 27.6 फीसदी है। इसमें ब्राह्मणों की हिस्सेदारी 13.3 फीसदी, क्षत्रियों की 9.6 फीसदी और वैश्यों की 4.7 फीसदी बताई जाती है।
2022 के विधानसभा चुनाव में BJP को करीब 41 फीसदी वोट मिले थे। माना जाता है कि इसमें सवर्ण मतदाताओं की अहम भूमिका रही। पिछले दो विधानसभा चुनावों में ब्राह्मणों का बड़ा हिस्सा BJP के साथ रहा। दावा किया जाता है कि 2017 में 83 फीसदी और 2022 में 89 फीसदी ब्राह्मण मतदाताओं ने BJP को वोट दिया था। क्षत्रिय और वैश्य मतदाताओं का समर्थन भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण रहा है।
BJP की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के वोट प्रतिशत में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। ऐसे में यदि BJP के पारंपरिक समर्थकों का साथ कमजोर पड़ता है तो पार्टी के लिए चुनावी समीकरण बिगड़ सकते हैं।
केशव मौर्य के कार्यक्रम के बाद BJP विधायक की पोस्ट से बढ़ी सियासी हलचल
UGC विवाद की गूंज BJP के भीतर भी सुनाई देने लगी है। प्रयागराज में केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे के बाद स्थानीय विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट लिखी। उन्होंने कहा कि UGC का विरोध करना हर ब्राह्मण और सवर्ण का अधिकार है। साथ ही उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जिन्होंने अपना नंबर बढ़ाने के लिए अपनों के साथ हिंसा की। पोस्ट में उन्होंने कहा कि कोई भी अपने बच्चे का नाम विभीषण नहीं रखता।
दरअसल, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केशव प्रसाद मौर्य इस बार अपनी विधानसभा सीट बदलना चाहते हैं। उनकी नजर प्रयागराज की शहर उत्तरी सीट पर बताई जा रही है, जहां से फिलहाल हर्षवर्धन वाजपेयी विधायक हैं।
इसी इलाके में केशव मौर्य के कार्यक्रम के दौरान UGC नियमों को लेकर विरोध हुआ था। आरोप लगाया गया कि नारेबाजी कर रहे युवक के साथ BJP पार्षद विनय मिश्रा सिंटू ने मारपीट की। इसके बाद हर्षवर्धन वाजपेयी की पोस्ट को लेकर भी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई। सवाल उठे कि उनका निशाना BJP पार्षद थे या केशव प्रसाद मौर्य। हालांकि, पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया गया था और इसके निशाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। फिर भी इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर जारी असहजता को सामने ला दिया है।
क्या हैं UGC के नए नियम, जिनको लेकर मचा हुआ है बवाल?
UGC के नए नियमों का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों और दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना तथा सभी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है। इन नियमों के तहत सरकारी कॉलेजों से लेकर निजी विश्वविद्यालयों तक प्रत्येक संस्थान में इक्विटी सेल बनाना अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था के तहत यदि किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ भेदभाव हुआ है तो वह संबंधित सेल में शिकायत दर्ज करा सकता है। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर संस्थान को कार्रवाई करनी होगी।
विवाद की सबसे बड़ी वजह जातिगत भेदभाव की परिभाषा में OBC वर्ग को शामिल करना है। पहले के मसौदे में इस तरह के भेदभाव से सुरक्षा के दायरे में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के विद्यार्थियों को रखा गया था। नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग को भी इसमें शामिल कर लिया गया।
नियमों का विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि इस व्यवस्था का दुरुपयोग हो सकता है और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। उनका कहना है कि ऐसे आरोपों से छात्रों की पढ़ाई, प्रतिष्ठा और भविष्य प्रभावित हो सकता है। इसी आशंका को लेकर विरोध लगातार तेज होता गया।
MLC चुनाव में BJP को झटका, UGC विवाद को बताया जा रहा एक कारण
UGC नियमों को लेकर सवर्ण समाज की नाराजगी के बीच हाल ही में हुए विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव भी चर्चा में आ गए हैं। दावा किया जा रहा है कि इस विवाद का असर BJP के प्रदर्शन पर पड़ा और पार्टी को अपने मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में झटका लगा। आगरा, वाराणसी और लखनऊ की सीटों पर पार्टी को नुकसान की चर्चा है। हालांकि, इस हार के पीछे UGC विवाद को एक वजह के तौर पर देखा जा रहा है।
इसके बाद BJP ने नाराजगी दूर करने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े ने भी एक्स पर पोस्ट कर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से समीक्षा कमेटी बनाए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कमेटी यह सुनिश्चित करेगी कि नियमों में किसी तरह के असंतुलन के कारण किसी भी वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव न हो। हर छात्र का सम्मान और हित सर्वोपरि है।
राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती सवर्ण और OBC मतदाताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की है। एक तरफ सवर्ण मतदाताओं की नाराजगी से पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक को नुकसान पहुंचने का खतरा है, तो दूसरी तरफ नियमों का खुलकर विरोध करने पर गैर-यादव OBC और दलित मतदाताओं के बीच गलत संदेश जाने की आशंका है।
ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से समीक्षा कमेटी बनाने की तैयारी BJP के लिए फिलहाल राहत का रास्ता बन सकती है। हालांकि, उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले इस विवाद का पूरी तरह समाधान करना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। यही वजह है कि BJP अब संघ के साथ मिलकर संगठनात्मक स्तर पर भी नाराजगी दूर करने और चुनावी समीकरण संभालने की कोशिश में जुटी है।
