इराक में अमेरिका-सऊदी का बड़ा सैन्य एक्शन, ईरान समर्थित ठिकानों पर संयुक्त एयर स्ट्राइक, बढ़ा पश्चिम एशिया में तनाव
बगदाद: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर गंभीर होते नजर आ रहे हैं। मंगलवार (28 जुलाई) को अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित ठिकानों पर संयुक्त एयर स्ट्राइक की। इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने की है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दी कार्रवाई की जानकारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में उन ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए, जिन्हें ईरान समर्थित समूहों से जुड़ा बताया गया है। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इन समूहों को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने के निर्देश दिए गए थे।
72 घंटे में 30 से अधिक ड्रोन हमलों की कोशिश का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, पिछले 72 घंटों के दौरान 30 से अधिक ड्रोन हमलों की कोशिश की गई। इसके जवाब में अमेरिका और सऊदी अरब ने पूर्वी इराक में मौजूद कई लॉजिस्टिक्स केंद्रों और हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी पक्ष ने दावा किया है कि उसके खिलाफ किए गए सभी हमलों को विफल कर दिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच ईरान समर्थित समूहों ने अमेरिकी ठिकानों पर 600 से अधिक बार हमले की कोशिश की।
होर्मुज संकट के समाधान पर जारी है चर्चा
इस बीच रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक नए समझौते की संभावना भी बन रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े संकट को कम करने के लिए एक अस्थायी समाधान पर चर्चा चल रही है। इसके तहत ओमान और ईरान के क्षेत्रों के बीच मौजूद समुद्री मार्ग के इस्तेमाल को लेकर विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल और गैस बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति इसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर निर्भर करती है, ऐसे में क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार नजर बनी हुई है।
